| 📌 अपडेट बॉक्स (8 अगस्त 2026) तेल कंपनियों का बयान: IOC, BPCL, HPCL ने साफ किया — E20 पेट्रोल में 500 ppm क्लोराइड/नमी वाले दावों की पुष्टि नहीं हुई जांच का दायरा: 100+ सैंपल, रिफाइनरी से पेट्रोल पंप तक पूरी सप्लाई चेन नतीजा: ज़्यादातर सैंपल में क्लोराइड सिर्फ 1 ppm या उससे कम — तय मानकों से काफी नीचे |
शुरुआत — गाड़ी खराब होने की चिंता में कितना दम है
पिछले कुछ हफ्तों से E20 पेट्रोल (20% इथेनॉल मिश्रित) को लेकर एक चिंता तेज़ी से फैल रही थी — कि इसमें ज़्यादा क्लोराइड और नमी है, जिससे पुरानी गाड़ियों के इंजन पार्ट्स में जंग लग सकती है और माइलेज घट सकता है। जुलाई के आखिर में ऑटो इंडस्ट्री की संस्था SIAM ने भी सरकार को चिट्ठी लिखकर यही चिंता जताई थी। सरकार के निर्देश पर तेल कंपनियों ने देशभर में बड़े पैमाने पर जांच अभियान चलाया, और 8 अगस्त 2026 को नतीजे सार्वजनिक किए — जिससे ज़्यादातर चिंताएं निराधार साबित हुईं।
| सीधा जवाब: इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने देशभर में रिफाइनरी से लेकर पेट्रोल पंप तक 100 से ज़्यादा सैंपल जांचे — ज़्यादातर में क्लोराइड की मात्रा सिर्फ 1 ppm या उससे कम पाई गई, जो 500 ppm वाले दावे से बहुत कम है। सिर्फ 4 जगहों पर क्लोराइड थोड़ा ज़्यादा मिला, जहां तुरंत आपूर्ति रोककर सुधार किया गया। कंपनियों के मुताबिक E20 पेट्रोल की गुणवत्ता तय मानकों के भीतर है, और गाड़ी मालिकों को घबराने की ज़रूरत नहीं है। |
विवाद कैसे शुरू हुआ
- जुलाई 2026 के आखिर में SIAM (Society of Indian Automobile Manufacturers) ने सरकार को चिट्ठी लिखकर E20 पेट्रोल में ज़्यादा क्लोराइड और नमी की आशंका जताई
- SIAM ने कहा था कि इससे कुछ इंजन पार्ट्स में जंग और घिसाव हो सकता है
- बाद में SIAM ने खुद अपनी चिट्ठी वापस ले ली, ये कहते हुए कि उनके आंकड़ों की और पुष्टि ज़रूरी है
- फिर भी सरकार ने एहतियातन तेल कंपनियों को देशभर में ईंधन गुणवत्ता की निगरानी सख्त करने का निर्देश दिया
जांच कैसे हुई
- रिफाइनरी, इथेनॉल बनाने वाली डिस्टिलरी (80 से ज़्यादा), डिपो, टर्मिनल और पेट्रोल पंप — पूरी सप्लाई चेन में जांच
- अलग-अलग रिफाइनरियों से 100 से ज़्यादा पेट्रोल सैंपल बेतरतीब तरीके से चुने गए
- इथेनॉल में क्लोराइड की मात्रा के लिए सरकार ने पहले से सख्त मानक तय कर रखे हैं
जांच का नतीजा क्या निकला
- ज़्यादातर सैंपल में क्लोराइड की मात्रा सिर्फ 1 ppm या उससे कम मिली — तय सीमा से काफी नीचे
- सिर्फ 4 स्थानों पर क्लोराइड का स्तर ज़्यादा पाया गया
- उन 4 जगहों पर तुरंत ईंधन आपूर्ति रोकी गई, कारणों की जांच हुई, और ज़रूरी सुधार के बाद ही आपूर्ति दोबारा शुरू हुई
- नमी और माइलेज घटने की शिकायतों का भी कोई ठोस सबूत जांच में नहीं मिला
तो क्या E20 पेट्रोल से गाड़ी को कोई खतरा नहीं है
तेल कंपनियों के मुताबिक, देशभर की सप्लाई चेन में ईंधन की गुणवत्ता तय मानकों के भीतर है, इसलिए मौजूदा हालात में घबराने की ज़रूरत नहीं। हालांकि, पुराने वाहनों (जो E20 के लिए डिज़ाइन नहीं किए गए) पर ब्लेंडेड फ्यूल के असर को लेकर कुछ चिंताएं अब भी बनी हुई हैं, और सरकार व तेल कंपनियां आगे भी निगरानी जारी रखेंगी।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या E20 पेट्रोल में सच में मिलावट है?
नहीं, देशव्यापी जांच में क्लोराइड/नमी के ज़्यादा होने के दावों की पुष्टि नहीं हुई — ज़्यादातर सैंपल तय मानकों के भीतर मिले।
ये विवाद कैसे शुरू हुआ?
SIAM (ऑटो इंडस्ट्री संस्था) ने जुलाई 2026 में क्लोराइड/नमी की आशंका जताई थी, बाद में अपनी चिट्ठी वापस ले ली।
जांच में कितने सैंपल लिए गए?
100 से ज़्यादा पेट्रोल सैंपल, पूरी सप्लाई चेन (रिफाइनरी से पेट्रोल पंप तक) से।
क्लोराइड की मात्रा कितनी मिली?
ज़्यादातर सैंपल में सिर्फ 1 ppm या उससे कम, जबकि आरोप 500 ppm का था।
क्या कहीं गड़बड़ी मिली?
सिर्फ 4 जगहों पर क्लोराइड थोड़ा ज़्यादा मिला, जहां तुरंत सुधार किया गया।
क्या E20 से माइलेज घटता है?
जांच में इसका कोई ठोस सबूत नहीं मिला।
कौन सी तेल कंपनियों ने जांच की?
इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL)।
क्या पुरानी गाड़ियों के लिए E20 सुरक्षित है?
मौजूदा जांच में गुणवत्ता ठीक मिली है, पर पुराने/असंगत इंजन पर असर को लेकर निगरानी जारी है।
क्या सरकार आगे भी निगरानी रखेगी?
हां, तेल कंपनियों को निगरानी और मज़बूत करने का निर्देश दिया गया है।
आम उपभोक्ता को क्या करना चाहिए?
घबराने की ज़रूरत नहीं — सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें, अफवाहों पर नहीं।
लेखक: सरिता मिश्रा — सरिता “सरकारी योजना” की मुख्य लेखिका हैं। वे केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं पर शोध करके उन्हें आसान हिंदी में समझाती हैं, ताकि हर आम परिवार ज़रूरी जानकारी आसानी से समझ सके। हर लेख आधिकारिक स्रोतों (PIB, मंत्रालय की वेबसाइट और सरकारी पोर्टल) से जाँचने के बाद ही प्रकाशित किया जाता है।



