| 📌 अपडेट बॉक्स मिशन: Digital Agriculture Mission — कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय कैबिनेट मंज़ूरी: सितंबर 2024, कुल आउटले ₹2,817 करोड़ (केंद्र का हिस्सा ₹1,940 करोड़) — PIB PRID 2050966 3 मुख्य स्तंभ (DPI): AgriStack, Krishi Decision Support System (DSS), Soil Profile Mapping Krishi-DSS लॉन्च: 16 अगस्त 2024, कृषि राज्य मंत्री श्री भगीरथ चौधरी द्वारा Soil Mapping कवरेज: लगभग 14.2 करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि, 1:10,000 स्केल पर 2026 अपडेट: Union Budget 2026 में AgriStack को “अगला UPI” बताया गया, Bharat VISTAAR AI प्लेटफ़ॉर्म की घोषणा हुई |
शुरुआत — एक जैसी समस्या, दो किसान
मेरठ के एक किसान को हर साल यह अंदाज़ा नहीं होता था कि उनकी मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी है — नतीजा, खाद पर ज़रूरत से ज़्यादा खर्च और उपज फिर भी कम। दूसरी तरफ बुंदेलखंड के एक किसान को बारिश/सूखे की सही जानकारी समय पर नहीं मिलती थी, जिससे बुवाई का फैसला गलत हो जाता था। Digital Agriculture Mission इन्हीं दो समस्याओं को हल करने के लिए बना है — एक तरफ मिट्टी का सटीक डिजिटल नक्शा (Soil Profile Mapping), दूसरी तरफ सैटेलाइट-मौसम डेटा पर आधारित सलाह (Krishi-DSS) — दोनों उसी राष्ट्रीय Farmer ID (AgriStack) से जुड़े हैं जो हर किसान को मिल रही है।
| सीधा जवाब: Digital Agriculture Mission भारत सरकार की ₹2,817 करोड़ की छाता योजना है, जिसके तहत तीन बड़े डिजिटल सिस्टम बन रहे हैं — किसान की पहचान व ज़मीन का रिकॉर्ड (AgriStack), सैटेलाइट-मौसम आधारित खेती सलाह (Krishi-DSS), और देश की मिट्टी का विस्तृत डिजिटल नक्शा (Soil Profile Mapping) — तीनों मिलकर किसान को सही समय पर सही सलाह और हर योजना का सीधा लाभ पहुंचाने के लिए बने हैं। |
एक नज़र में Digital Agriculture Mission
| बिंदु | जानकारी |
| मंत्रालय | कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय |
| कैबिनेट मंज़ूरी | सितंबर 2024 |
| कुल बजट | ₹2,817 करोड़ (केंद्रीय हिस्सा ₹1,940 करोड़) |
| 3 DPI स्तंभ | AgriStack, Krishi-DSS, Soil Profile Mapping |
| अतिरिक्त घटक | Digital General Crop Estimation Survey (DGCES), Mahalanobis National Crop Forecasting Centre (MNCFC) को सहयोग |
| Krishi-DSS लॉन्च | 16 अगस्त 2024 — कृषि मंत्रालय व अंतरिक्ष विभाग का संयुक्त प्रोजेक्ट |
| Soil Mapping स्केल | 1:10,000 — लगभग 14.2 करोड़ हेक्टेयर भूमि कवर |
| Farmer ID लक्ष्य | 11 करोड़ किसान (3 वर्ष में, चरणबद्ध) |
| आधिकारिक पोर्टल | agriwelfare.gov.in |
Digital Agriculture Mission क्या है
यह एक छाता (umbrella) मिशन है, जिसके तहत भारत सरकार खेती से जुड़े हर डिजिटल सिस्टम को एक साझा ढांचे में जोड़ रही है — ठीक वैसे जैसे UPI ने डिजिटल पेमेंट को जोड़ा। मकसद है: किसान को बार-बार अपनी पहचान और ज़मीन साबित न करनी पड़े, हर योजना का लाभ स्वतः और सही किसान तक पहुंचे, और सरकार को भी नीति बनाने के लिए सटीक, रीयल-टाइम डेटा मिले।
पहला स्तंभ — AgriStack (किसान डिजिटल पहचान)
AgriStack के तहत हर किसान को Aadhaar जैसी एक यूनिक Farmer ID मिलती है, जो ज़मीन, फसल और बैंक जानकारी को जोड़ती है। इसकी पूरी प्रक्रिया, 14 राज्यों में अनिवार्यता, और रजिस्ट्रेशन का तरीका हमारे अलग AgriStack आर्टिकल में विस्तार से बताया गया है — यहां क्लिक करके पूरी जानकारी पढ़ें।
दूसरा स्तंभ — Krishi Decision Support System (Krishi-DSS)
Krishi-DSS एक जियो-स्पेशियल प्लेटफ़ॉर्म है जिसे कृषि मंत्रालय और अंतरिक्ष विभाग (Department of Space) ने मिलकर 16 अगस्त 2024 को लॉन्च किया। यह सैटेलाइट इमेजरी, मौसम डेटा, मिट्टी की जानकारी, जलाशयों और भूजल स्तर के डेटा को एक जगह लाता है, ताकि किसानों, कृषि विस्तार अधिकारियों और नीति-निर्माताओं को लगभग रीयल-टाइम जानकारी मिल सके।
- फसल मैपिंग और मॉनिटरिंग — कई वर्षों के crop pattern का विश्लेषण
- सूखा निगरानी — मिट्टी की नमी, जल भंडारण और फसल की स्थिति पर रीयल-टाइम अलर्ट
- वन नेशन-वन सॉइल इन्फॉर्मेशन सिस्टम — मिट्टी के प्रकार, pH और सेहत का डेटा
- बाढ़ प्रभाव आकलन और फसल बीमा (PMFBY) क्लेम प्रोसेसिंग में सहयोग
- शोधकर्ताओं और उद्योग के लिए ग्राउंड-ट्रुथ डेटा लाइब्रेरी
तीसरा स्तंभ — Soil Profile Mapping (मिट्टी का डिजिटल नक्शा)
इस घटक के तहत देश की लगभग 14.2 करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि का 1:10,000 के बेहद बारीक स्केल पर मिट्टी प्रोफाइल मैप तैयार किया जा रहा है। इससे यह पता चलेगा कि किस इलाके की मिट्टी में कौन से पोषक तत्वों की कमी है, कौन सी फसल सबसे उपयुक्त रहेगी, और कितनी और कौन सी खाद देनी चाहिए — जिससे किसान की लागत घटेगी और उपज में सुधार होगा।
Digital General Crop Estimation Survey (DGCES)
यह घटक वैज्ञानिक crop-cutting experiments और तकनीक की मदद से देश में कुल कृषि उत्पादन का सटीक अनुमान तैयार करता है — जिससे MSP, खरीद योजना और फसल बीमा के फैसले ज़्यादा भरोसेमंद डेटा पर आधारित हो सकें। इसमें Mahalanobis National Crop Forecasting Centre (MNCFC) को तकनीकी सहयोग भी मिलता है।
किसान को अंततः क्या फायदा मिलेगा
- PM-Kisan, KCC, PMFBY जैसी योजनाओं का लाभ बिना बार-बार कागज़ात दिखाए, सीधा और तेज़
- मिट्टी की सही जानकारी से खाद और बीज पर सही खर्च, कम बर्बादी
- मौसम और सूखे की समय पर चेतावनी से बुवाई/कटाई के बेहतर फैसले
- फसल बीमा क्लेम में कम विवाद, ज़्यादा पारदर्शी डेटा-आधारित प्रोसेसिंग
- भविष्य में Bharat VISTAAR जैसे AI प्लेटफॉर्म से निजी, ज़मीन-विशेष सलाह
Bharat VISTAAR — इन सबको जोड़ने वाली अगली कड़ी
Union Budget 2026 में घोषित Bharat VISTAAR एक बहुभाषी AI प्लेटफ़ॉर्म है, जो AgriStack, Krishi-DSS और Soil Profile Mapping के डेटा को ICAR की वैज्ञानिक सलाह से जोड़कर किसान को उसकी अपनी ज़मीन, मिट्टी और मौसम के हिसाब से सीधी सलाह देगा — यानी Digital Agriculture Mission की नींव पर बना अगला बड़ा कदम।
संबंधित योजनाएं
- AgriStack — किसान डिजिटल पहचान (Farmer ID) की पूरी प्रक्रिया
- Bharat VISTAAR — AI आधारित किसान सलाह प्लेटफॉर्म
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)
- Farmer Registry — किसान पहचान पत्र
- PM Kisan Samman Nidhi
- राष्ट्रीय पेस्ट सर्विलांस सिस्टम (NPSS)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Digital Agriculture Mission और AgriStack में क्या फर्क है?
Digital Agriculture Mission एक बड़ी छाता योजना है, जिसके तीन स्तंभों में से एक AgriStack है — बाकी दो हैं Krishi-DSS और Soil Profile Mapping।
Krishi-DSS का इस्तेमाल किसान सीधे कैसे कर सकते हैं?
फिलहाल यह मुख्यतः सरकारी चैनलों और डैशबोर्ड के ज़रिए एक्सेस होता है; भविष्य में Bharat VISTAAR जैसे प्लेटफॉर्म से किसान तक सीधी सलाह पहुंचेगी।
Soil Profile Mapping का डेटा किसान कैसे देख पाएंगे?
जैसे-जैसे मैपिंग पूरी होगी, यह डेटा राज्य कृषि विभागों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए किसानों तक उपलब्ध कराया जाएगा।
इस मिशन का कुल बजट कितना है?
₹2,817 करोड़, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा ₹1,940 करोड़ है।
DGCES का किसान को क्या फायदा है?
इससे फसल उत्पादन का ज़्यादा सटीक अनुमान बनता है, जिससे MSP, खरीद और बीमा जैसे फैसले बेहतर आधार पर लिए जा सकते हैं।
क्या यह मिशन सिर्फ बड़े किसानों के लिए है?
नहीं, यह हर आकार की ज़मीन वाले किसानों के लिए है — छोटे और सीमांत किसानों को भी उतना ही फायदा मिलना है।
Krishi-DSS किसने लॉन्च किया?
16 अगस्त 2024 को कृषि राज्य मंत्री श्री भगीरथ चौधरी ने इसे लॉन्च किया।
Soil Mapping किस स्केल पर हो रही है?
1:10,000 के बारीक स्केल पर, लगभग 14.2 करोड़ हेक्टेयर भूमि को कवर करते हुए।
क्या यह मिशन PMFBY (फसल बीमा) से जुड़ा है?
हां, Krishi-DSS का डेटा फसल बीमा क्लेम को ज़्यादा सटीक और तेज़ बनाने में मदद करता है।
इस मिशन की जानकारी और अपडेट कहां मिलेंगे?
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की वेबसाइट (agriwelfare.gov.in) और agristack.gov.in पोर्टल पर।
लेखक: सरिता मिश्रा — सरिता “सरकारी योजना” की मुख्य लेखिका हैं। वे केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं पर शोध करके उन्हें आसान हिंदी में समझाती हैं, ताकि हर आम परिवार ज़रूरी जानकारी आसानी से समझ सके। हर लेख आधिकारिक स्रोतों (PIB, मंत्रालय की वेबसाइट और सरकारी पोर्टल) से जाँचने के बाद ही प्रकाशित किया जाता है।



