📌 अपडेट (मार्च 2026): पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने राज्यसभा में बताया — 11 मार्च 2026 तक 3.29 लाख गांवों में ड्रोन सर्वे पूरा। 3.10 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार, 2.65 करोड़ वितरित। उत्तर प्रदेश में अकेले 1.15 करोड़ कार्ड तैयार। (PIB PRID: 2241694)
स्वामित्व योजना क्या है?
स्वामित्व योजना (SVAMITVA — Survey of Villages and Mapping with Improvised Technology in Village Areas) भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है।
इसे 24 अप्रैल 2020 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू किया था।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य है — ग्रामीण आबादी क्षेत्र (Abadi Area) की भूमि का ड्रोन से सर्वे करके हर घर मालिक को कानूनी संपत्ति कार्ड (Property Card) देना — ताकि वह बैंक से लोन ले सके, संपत्ति विवाद खत्म हो और भूमि का सटीक रिकॉर्ड बने।
स्वामित्व योजना — त्वरित जानकारी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | स्वामित्व योजना (SVAMITVA) |
| पूरा नाम | Survey of Villages and Mapping with Improvised Technology in Village Areas |
| मंत्रालय | पंचायती राज मंत्रालय |
| लॉन्च तिथि | 24 अप्रैल 2020 |
| लागू क्षेत्र | सभी राज्यों के ग्रामीण आबादी क्षेत्र |
| सर्वे तकनीक | ड्रोन + CORS (Continuously Operating Reference Station) |
| दस्तावेज | संपत्ति कार्ड / घरौनी (UP में) |
| आधिकारिक पोर्टल | svamitva.nic.in |
| कुल बजट (2020-26) | ₹566.23 करोड़ |
| लक्षित गांव | 3.44 लाख |
स्वामित्व योजना के मुख्य लाभ
1. कानूनी संपत्ति का अधिकार पहली बार ग्रामीण घरों के मालिकों को सरकारी अधिकार अभिलेख (Record of Rights) मिलता है। दशकों से बिना कागज के रह रहे परिवारों को अब संपत्ति का कानूनी दस्तावेज मिल रहा है।
2. बैंक से लोन की सुविधा संपत्ति कार्ड को बैंक में गिरवी रखकर लोन लिया जा सकता है। SBI, PNB जैसे बड़े बैंक इस कार्ड पर होम लोन, मुद्रा लोन और बिजनेस लोन दे रहे हैं।
3. संपत्ति विवाद में कमी ड्रोन से सटीक नक्शा बनने से पड़ोसियों के बीच जमीन विवाद खत्म होते हैं।
4. महिला सह-स्वामित्व मध्य प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, मिजोरम, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में संपत्ति कार्ड में महिलाओं का सह-स्वामित्व भी दर्ज होता है — जिससे महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिलती है।
5. ग्राम पंचायत विकास में मदद सटीक नक्शे से ग्राम पंचायत स्तर पर बेहतर योजना बनाई जा सकती है। Gram Manchitra पोर्टल पर गांव का 3D नक्शा भी देखा जा सकता है।
6. DigiLocker से डाउनलोड 2026 में सरकार ने स्वामित्व संपत्ति कार्ड को DigiLocker से भी उपलब्ध करा दिया है।
स्वामित्व योजना 2026 — उपलब्धियां
| विवरण | संख्या (11 मार्च 2026 तक) |
|---|---|
| लक्षित गांव | 3,44,001 |
| ड्रोन सर्वे पूरे गांव | 3,29,374 (95.7%) |
| संपत्ति कार्ड तैयार गांव | 1,87,665 |
| कुल तैयार संपत्ति कार्ड | 3.10 करोड़ |
| कुल वितरित संपत्ति कार्ड | 2.65 करोड़ |
| UP में तैयार कार्ड | 1.15 करोड़ |
| UP में वितरित कार्ड | 1.01 करोड़ |
(स्रोत: PIB PRID 2241694, 18 मार्च 2026)
राज्यवार प्रमुख प्रगति (मार्च 2026)
| राज्य | तैयार संपत्ति कार्ड | वितरित संपत्ति कार्ड |
|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 1,15,82,743 | 1,01,31,232 |
| मध्य प्रदेश | 65,76,707 | 54,18,319 |
| महाराष्ट्र | 37,85,481 | 37,85,481 |
| हरियाणा | 25,15,646 | 25,15,646 |
| राजस्थान | 14,43,423 | 14,43,423 |
| गुजरात | 16,58,089 | 12,32,223 |
| कर्नाटक | 10,54,754 | 3,36,779 |
| कुल (भारत) | 3,10,10,249 | 2,65,70,115 |
अपना संपत्ति कार्ड कैसे डाउनलोड करें?
तरीका 1 — SVAMiTVA पोर्टल से
Step 1: svamitva.nic.in पर जाएं Step 2: “Property Card Prepared” सेक्शन पर क्लिक करें Step 3: अपना राज्य, जिला और गांव का नाम चुनें Step 4: लाभार्थी सूची में अपना नाम खोजें Step 5: कार्ड डाउनलोड करें
तरीका 2 — SMS लिंक से
जिनके कार्ड तैयार हो चुके हैं, उन्हें आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर SMS आता है। उस लिंक पर क्लिक करके सीधे डाउनलोड करें।
तरीका 3 — DigiLocker से (2026 नया)
DigiLocker ऐप खोलें → Search में “SVAMITVA” लिखें → आधार वेरीफाई करें → कार्ड डाउनलोड करें।
तरीका 4 — UP वालों के लिए
svamitva.up.gov.in पर जाएं। UP में इसे “घरौनी” कहा जाता है।
⚠️ ध्यान दें: अगर आपके गांव में अभी ड्रोन सर्वे नहीं हुआ तो कार्ड नहीं मिलेगा। पहले svamitva.nic.in पर Drone Survey Status चेक करें।
ड्रोन सर्वे कैसे होता है?
स्वामित्व योजना में ड्रोन सर्वे इस तरह होता है:
चरण 1 — चूना मार्कन (Chuuna Markan) सर्वे से पहले ग्राम पंचायत की निगरानी में सभी घर मालिक अपनी जमीन की सीमा पर सफेद चूने से निशान लगाते हैं।
चरण 2 — ड्रोन उड़ान भारतीय सर्वेक्षण विभाग के ड्रोन उच्च-रिज़ॉल्यूशन फोटो लेते हैं। CORS तकनीक से सटीक माप होता है।
चरण 3 — नक्शा तैयार ड्रोन डेटा से गांव का विस्तृत नक्शा तैयार होता है।
चरण 4 — जमीनी सत्यापन राज्य सरकार द्वारा जमीनी स्तर पर जांच और विवाद निवारण।
चरण 5 — संपत्ति कार्ड वितरण राज्य सरकार संपत्ति कार्ड (अधिकार अभिलेख) तैयार कर वितरित करती है।
संपत्ति कार्ड से बैंक लोन कैसे लें?
स्वामित्व संपत्ति कार्ड को कानूनी संपार्श्विक (Legal Collateral) के रूप में बैंक में इस्तेमाल किया जा सकता है।
लोन के प्रकार जो मिल सकते हैं:
- होम लोन (घर मरम्मत/निर्माण)
- पीएम मुद्रा लोन (छोटा व्यवसाय)
- कृषि लोन
- पर्सनल लोन
प्रक्रिया: नजदीकी SBI, PNB, बैंक ऑफ बड़ौदा या ग्रामीण बैंक की शाखा में जाएं → संपत्ति कार्ड + आधार + पासबुक लेकर जाएं → “SVAMITVA Property Loan” के लिए आवेदन करें।
💰 यूनिट/बिज़नेस शुरू करने के लिए बैंक लोन चाहिए?
घर बैठे ऑनलाइन लोन आवेदन करें — पात्रता मिनटों में पता चल जाती है, ब्रांच के चक्कर नहीं। (यह सुविधा योजना का हिस्सा नहीं, बैंक की अलग सेवा है।)
ऑनलाइन लोन आवेदन करें →डिस्क्लोज़र: इस लिंक के उपयोग पर हमें कमीशन मिल सकता है। आपके लिए यह सेवा मुफ्त है।
स्वामित्व योजना बनाम पारंपरिक भूलेख — अंतर
| विषय | स्वामित्व योजना | पुराना भूलेख |
|---|---|---|
| क्षेत्र | ग्रामीण आबादी (Abadi) | कृषि भूमि |
| तकनीक | ड्रोन + CORS | मैनुअल पटवारी रिकॉर्ड |
| दस्तावेज | संपत्ति कार्ड (कानूनी) | खसरा/खतौनी |
| बैंक लोन | हां — मान्य है | सीमित मान्यता |
| विवाद समाधान | ड्रोन नक्शे से स्पष्ट | अक्सर विवादित |
| महिला सह-स्वामित्व | कई राज्यों में हां | नहीं |
आधिकारिक स्रोत
- PIB PRID 2241694 — पंचायती राज मंत्रालय, 18 मार्च 2026
- आधिकारिक पोर्टल: svamitva.nic.in
- UP पोर्टल: svamitva.up.gov.in
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
स्वामित्व योजना क्या है?
स्वामित्व योजना पंचायती राज मंत्रालय की केंद्रीय योजना है जिसमें ड्रोन तकनीक से ग्रामीण आबादी क्षेत्र की भूमि का सर्वे कर घर मालिकों को कानूनी संपत्ति कार्ड दिया जाता है।
स्वामित्व संपत्ति कार्ड कैसे डाउनलोड करें?
svamitva.nic.in पर जाएं, “Property Card Prepared” में अपना राज्य-जिला-गांव चुनें और कार्ड डाउनलोड करें। SMS लिंक और DigiLocker से भी डाउनलोड होता है।
UP में स्वामित्व कार्ड को क्या कहते हैं?
उत्तर प्रदेश में स्वामित्व संपत्ति कार्ड को “घरौनी” कहा जाता है। इसे svamitva.up.gov.in से डाउनलोड किया जा सकता है।
क्या संपत्ति कार्ड से बैंक लोन मिल सकता है?
हां। स्वामित्व संपत्ति कार्ड कानूनी रूप से मान्य है और इसे SBI, PNB जैसे बैंकों में कोलैटरल के रूप में उपयोग कर होम लोन, मुद्रा लोन और बिजनेस लोन लिया जा सकता है।
2026 तक कितने संपत्ति कार्ड वितरित हुए?
11 मार्च 2026 तक 3.10 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार हो चुके हैं और 2.65 करोड़ वितरित किए जा चुके हैं।
अगर मेरे गांव में ड्रोन सर्वे नहीं हुआ तो क्या करें?
svamitva.nic.in पर Drone Survey Status में अपने गांव का नाम चेक करें। जहां सर्वे नहीं हुआ, वहां ग्राम पंचायत से संपर्क करें।
स्वामित्व योजना में महिलाओं को क्या लाभ है?
मध्य प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, मिजोरम सहित कई राज्यों में संपत्ति कार्ड में महिलाओं का सह-स्वामित्व भी दर्ज किया जाता है, जिससे उन्हें आर्थिक और कानूनी सुरक्षा मिलती है।
स्वामित्व और पीएम आवास योजना में क्या अंतर है?
स्वामित्व योजना पहले से मौजूद घरों का कानूनी रिकॉर्ड बनाती है जबकि पीएम आवास योजना नए घर बनाने के लिए आर्थिक सहायता देती है। दोनों अलग-अलग योजनाएं हैं।
स्वामित्व सर्वे में कौन सी तकनीक उपयोग होती है?
ड्रोन और CORS (Continuously Operating Reference Station) तकनीक का उपयोग होता है जो GPS से भी ज्यादा सटीक माप देती है।
क्या किरायेदार स्वामित्व कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं?
नहीं। स्वामित्व संपत्ति कार्ड केवल उस व्यक्ति को मिलता है जो उस जमीन/घर का वास्तविक मालिक है और जिसका नाम ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड में है।
UPSC/Current Affairs नोट: स्वामित्व योजना ग्रामीण भारत में भूमि अधिकार, वित्तीय समावेश और डिजिटल गवर्नेंस के त्रिभुज पर आधारित है। यह GS-II (सरकारी योजनाएं, पंचायती राज) और GS-III (भूमि सुधार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर) दोनों के लिए प्रासंगिक है। मार्च 2026 में राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार 3.29 लाख गांवों में ड्रोन सर्वे पूर्ण और 3.10 करोड़ कार्ड तैयार — यह आंकड़ा UPSC मेन्स में सटीक उदाहरण के रूप में उपयोगी है।
लेखक: सरिता मिश्रा — सरिता “सरकारी योजना” की मुख्य लेखिका हैं। वे केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं पर शोध करके उन्हें आसान हिंदी में समझाती हैं, ताकि हर आम परिवार ज़रूरी जानकारी आसानी से समझ सके। हर लेख आधिकारिक स्रोतों (PIB, मंत्रालय की वेबसाइट और सरकारी पोर्टल) से जाँचने के बाद ही प्रकाशित किया जाता है।



