| ताज़ा अपडेट (अगस्त 2026): • जुलाई 2026 तक इस योजना से देशभर में 115 लाख हेक्टेयर से ज़्यादा भूमि बूंद-बूंद सिंचाई के दायरे में आ चुकी है — यह भारत के कुल बोए गए क्षेत्र का लगभग 8.11% है। 2025-26 में अकेले 12.30 लाख किसान लाभान्वित हुए, जिनमें लगभग 20% महिलाएं थीं। • डिग्गी (खेत तालाब) और जल संचयन ढांचों के निर्माण के लिए पहले लागू फंडिंग सीमा (सामान्य राज्यों में 20%, पूर्वोत्तर/हिमालयी राज्यों व J&K-लद्दाख में 40%) अब पूरी तरह हटा दी गई है — राज्य अब अपनी ज़रूरत के अनुसार इससे ज़्यादा भी खर्च कर सकते हैं। |
| प्रति बूंद अधिक फसल (PDMC) योजना किसानों को खेत में ड्रिप या स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली लगाने पर सीधी सब्सिडी देती है — छोटे और सीमांत किसानों को कुल लागत का 55% और अन्य किसानों को 45% तक, अधिकतम 5 हेक्टेयर भूमि तक। यह योजना प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के तहत लागू है और राज्य कृषि/उद्यानिकी विभाग के ज़रिए संचालित होती है — आवेदन अपने ज़िला/ब्लॉक कृषि कार्यालय या राज्य के DBT कृषि पोर्टल से किया जा सकता है। एक ही ज़मीन पर दोबारा सब्सिडी 7 साल बाद मिल सकती है। |
सारांश
| बिंदु | जानकारी |
| योजना का नाम | प्रति बूंद अधिक फसल (PDMC), अब PM-RKVY का हिस्सा |
| सब्सिडी — छोटे/सीमांत किसान | इकाई लागत का 55% |
| सब्सिडी — अन्य किसान | इकाई लागत का 45% |
| अधिकतम भूमि सीमा | प्रति लाभार्थी 5 हेक्टेयर तक |
| दोबारा सब्सिडी | उसी ज़मीन पर 7 साल बाद संभव |
| आवेदन | ज़िला/ब्लॉक कृषि कार्यालय या राज्य का DBT कृषि पोर्टल (राज्य अनुसार अलग) |
| कवरेज (जुलाई 2026 तक) | 115 लाख+ हेक्टेयर |
| पिछले 3 साल में केंद्रीय सहायता | ₹8,123.24 करोड़ |
योजना क्यों ज़रूरी है?
आंध्र प्रदेश के पलनाडु ज़िले के किसान एल.एम. श्रीनिवास राव पारंपरिक बाढ़ सिंचाई से अपने 2 एकड़ के अम्लीय नींबू बगीचे को सींचते थे। PDMC योजना के तहत ड्रिप सिंचाई अपनाने के बाद उपज 90 से बढ़कर 105 क्विंटल प्रति एकड़ हो गई, फर्टिगेशन (सिंचाई के पानी के साथ खाद देना) से पोषक तत्व सीधे जड़ों तक पहुंचने लगे, और खेती की लागत में बड़ी कमी आई। नतीजा — उनकी शुद्ध आय ₹1.5 लाख से बढ़कर ₹2.85 लाख हो गई, यानी सिर्फ सिंचाई का तरीका बदलने से ₹1.35 लाख अतिरिक्त कमाई। यही इस योजना की ताकत है — कम पानी में ज़्यादा और बेहतर फसल।
सब्सिडी की राशि — कौन कितना पाता है
- छोटे और सीमांत किसान — ड्रिप/स्प्रिंकलर सिस्टम की इकाई लागत का 55% तक सब्सिडी।
- अन्य (बड़े) किसान — इकाई लागत का 45% तक सब्सिडी।
- अधिकतम सीमा — प्रति लाभार्थी 5 हेक्टेयर भूमि तक ही सब्सिडी मिलती है।
- कई राज्य सरकारें अपने बजट से अतिरिक्त सब्सिडी भी देती हैं — अपने राज्य के कृषि विभाग से जानकारी लें।
- उसी भूमि पर दोबारा सिंचाई प्रणाली के लिए सब्सिडी 7 साल बाद ही दोबारा ली जा सकती है।
ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई के प्रकार
ड्रिप सिंचाई (दो प्रकार):
- ऑन-लाइन ड्रिप — हर पौधे को अलग ड्रिपर से पानी, असमान दूरी वाली फसलों के लिए उपयुक्त।
- इन-लाइन ड्रिप — पाइप में तय दूरी पर लगे ड्रिपर से सभी पौधों को बराबर पानी।
स्प्रिंकलर सिंचाई (चार प्रकार):
- पोर्टेबल स्प्रिंकलर — पाइप को खेत के अलग-अलग हिस्सों में ले जाया जा सकता है।
- माइक्रो स्प्रिंकलर — पत्तेदार सब्जियों और नर्सरी के लिए, कम रेडियस।
- मिनी स्प्रिंकलर — मूंगफली, आलू, प्याज, अदरक जैसी करीबी फसलों के लिए।
- रेन-गन (बड़ी मात्रा में स्प्रिंकलर) — बड़े क्षेत्र को एक-दो स्प्रिंकलर से कवर करने के लिए, 24-36 मीटर तक थ्रो रेडियस।
पात्रता
- आवेदक भारत का किसान हो, चाहे वह छोटा, सीमांत या बड़ा किसान हो।
- आवेदक के पास खेती योग्य ज़मीन का स्वामित्व/सिंचाई प्रमाण पत्र हो।
- अधिकतम 5 हेक्टेयर तक भूमि के लिए ही सब्सिडी मिलती है।
- उसी ज़मीन पर पहले से सब्सिडी ली है तो 7 साल पूरे होने के बाद ही दोबारा आवेदन कर सकते हैं।
ज़रूरी दस्तावेज़
- आधार कार्ड
- बैंक पासबुक की छायाप्रति (आधार-लिंक्ड खाता)
- भूमि स्वामित्व प्रमाण/खसरा (सिंचाई प्रमाण पत्र सहित)
- निवास प्रमाण पत्र
- पासपोर्ट साइज़ फोटो
- SC/ST प्रमाण पत्र (अगर लागू हो)
आवेदन कैसे करें
यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, पर लागू राज्य सरकारों के कृषि/उद्यानिकी विभाग के ज़रिए होती है — इसलिए ठीक-ठीक प्रक्रिया राज्य के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है। सामान्य तरीका:
- अपने नज़दीकी ज़िला या ब्लॉक कृषि कार्यालय से संपर्क करें, या राज्य के कृषि विभाग/DBT कृषि पोर्टल पर जाएं (जैसे मध्य प्रदेश में dbt.mpdage.org)।
- किओस्क/ऑनलाइन सेंटर से पोर्टल पर पंजीकरण करें।
- आवेदन फॉर्म भरें और ज़रूरी दस्तावेज़ (आधार, खसरा/सिंचाई प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक, फोटो) अपलोड/जमा करें।
- कृषि विभाग द्वारा सत्यापन के बाद सिस्टम इंस्टॉलेशन की स्वीकृति मिलती है।
- सब्सिडी की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में (या कुछ राज्यों में सिस्टम लगाने वाली कंपनी को) ट्रांसफर होती है।
myscheme.gov.in और राष्ट्रीय कृषि पोर्टल पर भी योजना की सामान्य जानकारी मिलती है, पर आवेदन हमेशा अपने राज्य के आधिकारिक पोर्टल/कार्यालय से ही करें।
जल संरक्षण के लिए नया प्रावधान — डिग्गी और जल संचयन
PDMC के “अन्य हस्तक्षेप” घटक के तहत अब राज्यों को डिग्गी (बड़े जल भंडारण टैंक/खेत तालाब) और जल संचयन प्रणालियां बनाने के लिए ज़्यादा आज़ादी दी गई है। पहले सामान्य राज्यों में इस पर कुल आवंटित राशि का सिर्फ 20% (पूर्वोत्तर/हिमालयी राज्यों और J&K-लद्दाख में 40%) तक ही खर्च हो सकता था — यह सीमा अब पूरी तरह हटा दी गई है। यह व्यक्तिगत या सामुदायिक उपयोग दोनों के लिए बनाई जा सकती हैं, जिससे बूंद-बूंद सिंचाई के लिए भरोसेमंद पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होती है।
आम गलतियाँ जिनसे बचें
- 5 हेक्टेयर से ज़्यादा ज़मीन के लिए पूरी सब्सिडी की उम्मीद रखना — सब्सिडी सीमा प्रति लाभार्थी 5 हेक्टेयर तक ही है।
- सिंचाई प्रमाण पत्र के बिना सिर्फ सामान्य खसरा जमा करना — कई राज्यों में सिंचाई प्रमाण पत्र (जैसे बी-1 खसरा) अलग से मांगा जाता है।
- 7 साल पूरे होने से पहले उसी ज़मीन पर दोबारा सब्सिडी के लिए आवेदन करने की कोशिश करना।
- सीधे केंद्र सरकार के किसी एक पोर्टल पर आवेदन ढूंढना — असल आवेदन राज्य कृषि विभाग/DBT पोर्टल से होता है, राज्य अनुसार लिंक अलग है।
संबंधित सेवाएं और योजनाएं
इस योजना से जुड़ी इन सेवाओं की जानकारी भी देखें:
- PM Kisan Samman Nidhi 2026
- किसान क्रेडिट कार्ड योजना
- प्रधानमंत्री कुसुम योजना 2026
- SMAM योजना 2026 (कृषि यांत्रिकीकरण पर सब-मिशन)
- परंपरागत कृषि विकास योजना 2026 (PKVY)
- राष्ट्रीय कृषि विकास योजना 2026 (PM-RKVY)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रति बूंद अधिक फसल योजना में कितनी सब्सिडी मिलती है?
छोटे और सीमांत किसानों को इकाई लागत का 55% और अन्य किसानों को 45% तक, अधिकतम 5 हेक्टेयर भूमि के लिए।
आवेदन कहां से करें?
अपने ज़िला/ब्लॉक कृषि कार्यालय से या राज्य के कृषि विभाग/DBT कृषि पोर्टल से — यह राज्य के अनुसार अलग-अलग है।
क्या यह योजना सिर्फ छोटे किसानों के लिए है?
नहीं, सभी वर्ग के किसान पात्र हैं — बस सब्सिडी दर छोटे/सीमांत किसानों के लिए ज़्यादा (55%) और अन्य के लिए कम (45%) है।
एक ही ज़मीन पर दोबारा सब्सिडी मिल सकती है क्या?
हां, पर उसी भूमि पर सिंचाई प्रणाली के लिए दोबारा सब्सिडी 7 साल बाद ही मिल सकती है।
सब्सिडी की राशि कैसे मिलती है?
ज़्यादातर मामलों में सीधे किसान के बैंक खाते में, कुछ राज्यों में सिस्टम लगाने वाली कंपनी को सीधे भुगतान किया जाता है।
यह योजना किस बड़ी योजना के तहत आती है?
यह प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) का एक प्रमुख घटक है — 2022-23 से यह इसी के तहत लागू है।
क्या फर्टिगेशन (खाद-सिंचाई साथ में) भी इस योजना में शामिल है?
हां, योजना फर्टिगेशन को भी प्रोत्साहित करती है ताकि सिंचाई के पानी के साथ पोषक तत्व सीधे जड़ों तक पहुंचें।
जल संरक्षण के लिए डिग्गी बनाने पर भी मदद मिलती है क्या?
हां, “अन्य हस्तक्षेप” घटक के तहत डिग्गी और जल संचयन ढांचों के निर्माण को बढ़ावा दिया जाता है, और अब इस पर खर्च की सीमा भी हटा दी गई है।
योजना अभी तक देशभर में कितनी ज़मीन कवर कर चुकी है?
जुलाई 2026 तक 115 लाख हेक्टेयर से अधिक — यह भारत के कुल बोए गए क्षेत्र का लगभग 8.11% है।
कौन से राज्य इस योजना में सबसे आगे हैं?
2025-26 में महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात और राजस्थान में सबसे ज़्यादा क्षेत्र बूंद-बूंद सिंचाई के तहत कवर हुआ।
लेखक: सरिता मिश्रा — सरिता “सरकारी योजना” की मुख्य लेखिका हैं। वे केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं पर शोध करके उन्हें आसान हिंदी में समझाती हैं, ताकि हर आम परिवार ज़रूरी जानकारी आसानी से समझ सके। हर लेख आधिकारिक स्रोतों (PIB, मंत्रालय की वेबसाइट और सरकारी पोर्टल) से जाँचने के बाद ही प्रकाशित किया जाता है।



