| 📌 अपडेट (सितंबर 2026): ग्रामीण विकास मंत्रालय ने VB-G RAM G के तहत कुशल (Skilled), अर्धकुशल (Semi-Skilled) मजदूरों और मेट (Mate) के लिए अलग मानक संचालन प्रक्रिया (SoP) जारी की है। इसमें पहली बार साफ़ हुआ है कि मेट की तैनाती का अनुपात राज्य के हिसाब से अलग होगा — उत्तराखंड सहित हिमालयी राज्यों में हर 10 मजदूर पर 1 मेट, जबकि बाक़ी राज्यों में हर 20 मजदूर पर 1 मेट। SoP में यह भी तय हुआ है कि मेट को अर्धकुशल दर से मजदूरी मिलेगी, हाजिरी NMMS ऐप में फेस ऑथेंटिकेशन से लगेगी, नाप मस्टर रोल बंद होने के तीन दिन के भीतर होगी और भुगतान DBT-SPARSH से सीधे बैंक खाते में जाएगा। |
गाँव के काम पर एक आदमी हमेशा दिखता है — जो नाप लेता है, हाजिरी लगाता है, रजिस्टर में लिखता है। मजदूर उसे “मेट” कहते हैं। ज़्यादातर लोगों को यह नहीं पता कि मेट भी योजना का दर्ज कर्मचारी होता है, उसकी मजदूरी तय दर से मिलती है, और अब उसका रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर होता है।
MGNREGA की जगह 1 जुलाई 2026 से लागू VB-G RAM G अधिनियम, 2025 में यह पूरा हिस्सा नए सिरे से तय हुआ है। अब सिर्फ़ अकुशल मजदूर नहीं — कुशल और अर्धकुशल मजदूरों तथा मेट का भी रजिस्ट्रेशन, तैनाती, हाजिरी और भुगतान एक तय प्रक्रिया से होगा।
अगर आपके पास राजमिस्त्री, बढ़ई, लोहार जैसा कोई हुनर है, या आप गाँव में मेट का काम करना चाहती/चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है। मैं पूरी प्रक्रिया क्रम से समझा रही हूं।
सीधा जवाब — मेट कौन होता है और उसे कितनी मजदूरी मिलती है?
| मेट (Mate) वह व्यक्ति है जो कार्यस्थल पर मजदूरों की देखरेख करता है — काम की निशानदेही करना, रोज़ाना हाजिरी लेना, रोज़ नाप लेना, फील्ड मेजरमेंट बुक (FMB) भरना और हर मजदूर के ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड में किए गए काम और मिली मजदूरी का ब्योरा दर्ज करना। मजदूरी: मेट को अर्धकुशल (Semi-Skilled) दर से मजदूरी मिलती है, जो VB-G RAM G के वेतन घटक (wage component) से दी जाती है। ध्यान दें: अर्धकुशल और कुशल की सटीक दरें हर राज्य की अनुसूची दर (Schedule of Rates) पर निर्भर करती हैं, इसलिए अपनी दर ब्लॉक कार्यालय से ही पुष्ट करें। SoP दर की राशि तय नहीं करती — वह श्रेणी और प्रक्रिया तय करती है। |
एक नज़र में — पूरी जानकारी
| बिंदु | विवरण |
| किस कानून के तहत | VB-G RAM G अधिनियम, 2025 — 1 जुलाई 2026 से लागू |
| किन श्रेणियों पर लागू | कुशल (Skilled), अर्धकुशल (Semi-Skilled) मजदूर और मेट |
| पहचान कौन करेगा | ग्राम रोजगार सहायक (GRS) / पंचायत सचिव — फील्ड स्तर पर |
| मंज़ूरी कौन देगा | कार्यक्रम अधिकारी (Programme Officer) |
| रजिस्ट्रेशन कहाँ | VB-G RAM G Soft |
| मेट का अनुपात (उत्तराखंड व हिमालयी राज्य) | 10 मजदूर पर 1 मेट, 40 मजदूर तक |
| मेट का अनुपात (शेष राज्य) | 20 मजदूर पर 1 मेट, 40 मजदूर तक |
| 40 से ऊपर | हर अतिरिक्त 10 मजदूर पर 1 और मेट — 80 मजदूर तक |
| मेट की मजदूरी | अर्धकुशल दर |
| हाजिरी | NMMS ऐप में फेस ऑथेंटिकेशन — जियो-टैग व टाइम-स्टैंप सहित |
| नाप (Measurement) | मस्टर रोल बंद होने के 3 दिन के भीतर, डिजिटल रूप से |
| भुगतान | DBT-SPARSH से सीधे बैंक खाते में |
| तैनाती की सीमा | अपनी ग्राम पंचायत या उसी ब्लॉक की दूसरी ग्राम पंचायत — ब्लॉक से बाहर नहीं |
| यात्रा भत्ता (TA) | निवास से 5 किमी से दूर कार्यस्थल पर TA देय नहीं |
कुशल/अर्धकुशल मजदूर का रजिस्ट्रेशन कैसे होगा
- पहचान: ग्राम रोजगार सहायक या पंचायत सचिव गाँव में जाकर हुनर, दक्षता, अनुभव और स्वीकृत कार्यों की ज़रूरत के आधार पर कुशल व अर्धकुशल मजदूरों की पहचान करते हैं।
- सत्यापन व मंज़ूरी: कार्यक्रम अधिकारी (PO) श्रेणी और रजिस्ट्रेशन की जाँच करके मंज़ूरी देते हैं। इसके लिए VB-G RAM G Soft में व्यवस्था दी गई है।
- पुराने कार्डधारकों की मैपिंग: जो मजदूर पहले से ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड (GRG कार्ड) पर दर्ज हैं, उन्हें सत्यापन के बाद उचित कुशल/अर्धकुशल श्रेणी में मैप किया जा सकता है। ऐसी श्रेणी के लिए अलग ऑपरेशनल रजिस्ट्रेशन नंबर बन सकता है, पर पुराने GRG कार्ड से जुड़ाव बना रहता है।
- ये विवरण दर्ज होंगे: मोबाइल नंबर; हुनर की श्रेणी/ट्रेड (जो स्वीकृत कार्य और अनुसूची दर के मद से मेल खाता हो); जहाँ लागू हो वहाँ योग्यता व अनुभव; तथा आधार विवरण — जो भारत सरकार/UIDAI के प्रावधानों के अनुसार और ज़रूरी सहमति लेने के बाद ही लिए व प्रमाणित किए जाएंगे।
- e-KYC: सभी पंजीकृत कुशल/अर्धकुशल मजदूरों और मेट का e-KYC राज्य सुनिश्चित करेंगे। अगर किसी ने अकुशल मजदूर के रूप में वैध e-KYC पहले ही करा रखा है, तो सिस्टम सत्यापन के बाद वही मान्य होगा — दोबारा कराने की ज़रूरत नहीं।
श्रेणी बदलवाई जा सकती है
अकुशल, अर्धकुशल और कुशल — इन तीनों श्रेणियों के बीच मजदूर को उसकी सत्यापित दक्षता और काम की प्रकृति के आधार पर बदला जा सकता है। नियम ये हैं:
- श्रेणी बदलने की मंज़ूरी कार्यक्रम अधिकारी देंगे, निर्धारित साक्ष्य/सत्यापन के आधार पर।
- हर बदलाव का सिस्टम में ऑडिट ट्रेल बनेगा — पुरानी श्रेणी, नई श्रेणी, बदलाव की तारीख़, मंज़ूरी देने वाला अधिकारी और आधार।
- मजदूर की पहचान एक ही रहेगी। श्रेणी बदलने से न डुप्लिकेट रजिस्ट्रेशन बनेगा, न दोहरा रोजगार रिकॉर्ड, न दोहरा भुगतान।
मेट का रजिस्ट्रेशन और तैनाती के नियम
मेट की पहचान होकर, सक्षम अधिकारी के सत्यापन के बाद VB-G RAM G Soft में रजिस्ट्रेशन होता है। कार्यस्थल पर तैनाती इन मानकों से होती है:
| स्थिति | मेट का अनुपात |
| हिमालयी राज्य/केंद्रशासित प्रदेश — जम्मू–कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पूर्वोत्तर राज्य, अंडमान–निकोबार, पुडुचेरी, दादरा–नगर हवेली, लक्षद्वीप | 40 मजदूर तक — हर 10 मजदूर पर 1 मेट |
| शेष सभी राज्य/केंद्रशासित प्रदेश | 40 मजदूर तक — हर 20 मजदूर पर 1 मेट |
| 40 से अधिक मजदूर होने पर | हर अतिरिक्त 10 मजदूर पर 1 और मेट, 80 मजदूर तक — उचित पर्यवेक्षण के लिए |
मेट के काम
- काम की निशानदेही (marking out) करना
- रोज़ाना हाजिरी लेना — फेस ऑथेंटिकेशन से, या जहाँ लागू हो वहाँ भौतिक मस्टर रोल से
- रोज़ नाप लेना
- फील्ड मेजरमेंट बुक (FMB) भरना और रखना
- हर मजदूर के ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड में किए गए काम की मात्रा और मिली मजदूरी दर्ज करना
NMMS ऐप में मेट को उन कुशल/अर्धकुशल मजदूरों की सूची दिखती है जो उसके कार्यस्थल से मैप हैं, ताकि हाजिरी और पर्यवेक्षण ठीक से हो सके।
एक मेट, कई कार्यस्थल — और उसका भुगतान
वैयक्तिक लाभार्थी कार्यों और छोटे सामुदायिक कार्यों में, जहाँ अलग से पूरे मेट की तैनाती जायज़ नहीं बनती, वहाँ एक मेट को कई कार्यस्थलों से मैप किया जा सकता है — जहाँ तक व्यावहारिक हो।
ऐसे मेट, जो कई कार्यस्थलों पर लगे हैं, उनकी मजदूरी जिला स्तर पर वेतन घटक के कुल मजदूरी व्यय के 1% में से दी जाएगी। मेट की तैनाती ज़रूरत के हिसाब से ठीक हो रही है या नहीं, यह कार्यक्रम अधिकारी और जिला कार्यक्रम समन्वयक रोज़ देखेंगे।
काम पर तैनाती के नियम
- क्रियान्वयन एजेंसी पहले स्वीकृत एस्टीमेट, काम की प्रकृति, तकनीकी विनिर्देश और लागू अनुसूची दर देखकर तय करती है कि कितने कुशल/अर्धकुशल मजदूर चाहिए।
- मजदूर सिर्फ़ स्वीकृत कार्यों पर, और सिर्फ़ उन्हीं गतिविधियों पर लगाए जाएंगे जो उनकी सत्यापित श्रेणी से मेल खाती हों।
- काम का आवंटन और मेट की मस्टर रोल से मैपिंग — e-मस्टर बनने से पहले VB-G RAM G Soft में दर्ज होनी चाहिए।
- सिस्टम एक ही अवधि में एक मजदूर का दोहरा या ओवरलैपिंग आवंटन नहीं होने देगा।
- तैनाती अपनी ग्राम पंचायत में, और ज़रूरत पड़ने पर उसी ब्लॉक की दूसरी ग्राम पंचायतों में हो सकती है। ब्लॉक की सीमा से बाहर किसी भी हाल में नहीं।
- यात्रा भत्ता: अगर कार्यस्थल निवास से 5 किमी के दायरे से बाहर है, तो कुशल/अर्धकुशल मजदूरों और मेट को TA देय नहीं होगा।
असली उदाहरण से समझें — कितने मेट लगेंगे
मान लीजिए एक कार्यस्थल है जहाँ अलग-अलग दिनों में अलग संख्या में मजदूर लगते हैं। उत्तराखंड (हिमालयी श्रेणी) और किसी मैदानी राज्य में मेट की संख्या ऐसे अलग बनेगी:
| कार्यस्थल पर मजदूर | उत्तराखंड / हिमालयी राज्य (1 : 10) | शेष राज्य (1 : 20) |
| 20 मजदूर | 2 मेट | 1 मेट |
| 40 मजदूर | 4 मेट | 2 मेट |
| 60 मजदूर | 6 मेट (40 तक 4 + अगले 20 पर 2) | 4 मेट (40 तक 2 + अगले 20 पर 2) |
| 80 मजदूर | 8 मेट (40 तक 4 + अगले 40 पर 4) | 6 मेट (40 तक 2 + अगले 40 पर 4) |
इससे तीन बातें साफ़ होती हैं:
- उत्तराखंड में मेट के मौके दोगुने हैं। 40 मजदूर वाले कार्यस्थल पर मैदानी राज्य में 2 मेट लगते, उत्तराखंड में 4 लगेंगे — क्योंकि पहाड़ में कार्यस्थल बिखरे होते हैं और पर्यवेक्षण मुश्किल।
- 40 के बाद नियम दोनों जगह एक जैसा है। 40 मजदूर के ऊपर हर अतिरिक्त 10 पर 1 मेट — यह हिस्सा राज्य के हिसाब से नहीं बदलता। ऊपरी सीमा 80 मजदूर है।
- बीच की संख्या पर ब्लॉक से पुष्टि करें। ऊपर की तालिका पूरी संख्याओं पर बनी है। मान लीजिए 35 या 62 मजदूर हैं — ऐसी स्थिति में गिनती कैसे होगी, यह SoP में अलग से नहीं लिखा। इसलिए ब्लॉक कार्यालय से ही पुष्ट करें, अंदाज़े से न चलें।
e-मस्टर रोल, हाजिरी, नाप और भुगतान — पूरी चेन
1. e-मस्टर रोल
- कुशल/अर्धकुशल मजदूरों और मेट के लिए e-मस्टर रोल VB-G RAM G Soft से निर्धारित प्रारूप में बनेगा।
- हर e-मस्टर का एक यूनिक इलेक्ट्रॉनिक नंबर होगा, और उसमें आवंटित मजदूरों के नाम व रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज होंगे।
- इनकी मस्टर रोल अवधि उसी कार्यस्थल पर अकुशल मजदूरों के लिए जारी e-मस्टर रोल की अवधि के बराबर होगी, या उसी के भीतर पड़ेगी।
- e-मस्टर संबंधित कार्यक्रम अधिकारी जारी और प्रमाणित करेंगे।
2. फेस ऑथेंटिकेशन से हाजिरी
- कुशल और अर्धकुशल मजदूरों की हाजिरी NMMS ऐप में फेस ऑथेंटिकेशन से, निर्धारित NMMS दिशानिर्देशों के अनुसार दर्ज होगी।
- मेट या अधिकृत कर्मचारी कार्यस्थल पर ही हाजिरी लेंगे। रिकॉर्ड जियो-टैग और टाइम-स्टैंप के साथ दर्ज होगा।
- ऑथेंटिकेशन फेल होने पर निर्धारित अपवाद (exception) व्यवस्था अपनाई जाएगी और वह लेनदेन डिजिटल रूप से दर्ज होगा।
3. नाप और मजदूरी की गणना
- e-मस्टर बंद होने के बाद अधिकृत तकनीकी कर्मचारी काम की नाप करेंगे।
- नाप मस्टर रोल बंद होने के तीन दिन के भीतर पूरी होकर डिजिटल रूप से दर्ज होगी।
- मजदूरी वैध हाजिरी, नापे गए काम और लागू अनुसूची दर/मजदूरी दर के आधार पर बनेगी। अधिनियम कहता है कि मजदूरी पूरे किए गए काम की मात्रा से जुड़ी होगी।
- हाजिरी और नाप की जाँच के बाद मजदूरी सूची इलेक्ट्रॉनिक रूप से बनेगी।
4. DBT-SPARSH से भुगतान
मजदूरी VB-G RAM G के वेतन घटक से, DBT-SPARSH ढाँचे के ज़रिए दी जाएगी। रास्ता यह है:
| VB-G RAM G Soft में FTO बनेगा → राज्य IFMIS को भेजा जाएगा → DBT-SPARSH (PFMS, RBI, NPCI) → सीधे मजदूर के बैंक खाते में |
अगर कोई लेनदेन रिजेक्ट हो जाता है, तो DBT-SPARSH की निर्धारित व्यवस्था के तहत उसे दोबारा बनाकर प्रोसेस किया जाएगा, ताकि मजदूरी समय पर पहुँचे।
मेट या कुशल मजदूर बनना चाहते हैं तो क्या करें
- अपनी ग्राम पंचायत के ग्राम रोजगार सहायक या पंचायत सचिव से मिलिए — पहचान का काम यहीं से शुरू होता है।
- अपना हुनर बताइए और जो भी प्रमाण हो, साथ रखिए — ITI या कौशल प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र, पुराने काम का अनुभव, या जिस ट्रेड में काम किया उसका ब्योरा।
- अगर आपके पास पहले से ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड है, तो वही साथ ले जाइए — सत्यापन के बाद उसी कार्ड से जुड़ी नई श्रेणी मैप हो सकती है।
- मोबाइल नंबर और बैंक खाते का विवरण दुरुस्त रखिए, और e-KYC पूरा करा लीजिए — भुगतान सीधे इसी खाते में आएगा।
- श्रेणी की अंतिम मंज़ूरी कार्यक्रम अधिकारी देते हैं, पंचायत नहीं। इसलिए पंचायत में आवेदन देने के बाद ब्लॉक स्तर पर स्थिति ज़रूर पूछिए।
पंचायत सचिव का प्रमाण–पत्र
SoP में पंचायत सचिव के लिए एक निर्धारित प्रमाण-पत्र (Undertaking) भी दिया गया है, जिसमें सचिव यह प्रमाणित करते हैं कि उन्होंने उपलब्ध अभिलेख, दस्तावेज़ी साक्ष्य या फील्ड सत्यापन के आधार पर मजदूर का विवरण जाँच लिया है। इसमें ये कॉलम होते हैं:
- मजदूर का नाम
- GRG कार्ड संख्या
- श्रेणी — कुशल / अर्धकुशल / मेट
- हुनर की श्रेणी या ट्रेड
- जहाँ लागू हो वहाँ योग्यता व अनुभव
- पंचायत सचिव के नाम, हस्ताक्षर, तारीख़ व स्थान
इन्हें भी पढ़ें
- VB-G RAM G अधिनियम 2025 — 125 दिन रोजगार, मजदूरी दर और जॉब कार्ड की पूरी जानकारी
- ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड (GRG Card) — कैसे बनवाएँ
- NMMS ऐप और फेस ऑथेंटिकेशन — हाजिरी की नई व्यवस्था
- विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) — गाँव की योजना कैसे बनती है
- VB-G RAM G सोशल ऑडिट — गाँव में काम की जाँच कैसे होती है
- बेरोजगारी भत्ता और विलंब मुआवज़ा — VB-G RAM G में आपके अधिकार
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
VB-G RAM G में मेट कौन बन सकता है?
मेट की पहचान ग्राम रोजगार सहायक या पंचायत सचिव करते हैं, और सक्षम अधिकारी के सत्यापन के बाद VB-G RAM G Soft में रजिस्ट्रेशन होता है। पहचान का आधार व्यक्ति का हुनर, दक्षता, अनुभव और काम की ज़रूरत होती है।
मेट को कितनी मजदूरी मिलती है?
मेट को अर्धकुशल (Semi-Skilled) दर से मजदूरी मिलती है, जो योजना के वेतन घटक से दी जाती है। सटीक राशि राज्य की अनुसूची दर पर निर्भर करती है, इसलिए अपने ब्लॉक कार्यालय से पुष्टि करें।
उत्तराखंड में कितने मजदूरों पर एक मेट लगेगा?
उत्तराखंड सहित हिमालयी राज्यों और कुछ केंद्रशासित प्रदेशों में 40 मजदूर तक हर 10 मजदूर पर 1 मेट लगेगा। शेष राज्यों में हर 20 मजदूर पर 1 मेट।
40 से ज़्यादा मजदूर होने पर कितने मेट लगेंगे?
40 मजदूर से ऊपर हर अतिरिक्त 10 मजदूर पर 1 और मेट लगाया जा सकता है, 80 मजदूर तक।
क्या एक मेट कई कार्यस्थलों पर काम कर सकता है?
हाँ। वैयक्तिक लाभार्थी कार्यों और छोटे सामुदायिक कार्यों में, जहाँ अलग मेट की तैनाती जायज़ नहीं बनती, वहाँ एक मेट को कई कार्यस्थलों से मैप किया जा सकता है। ऐसे मेट की मजदूरी जिला स्तर पर कुल मजदूरी व्यय के 1% में से दी जाती है।
मेट के काम क्या-क्या हैं?
काम की निशानदेही, रोज़ाना हाजिरी लेना, रोज़ नाप लेना, फील्ड मेजरमेंट बुक भरना, और हर मजदूर के ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड में किए गए काम व मिली मजदूरी दर्ज करना।
क्या अकुशल मजदूर कुशल या अर्धकुशल श्रेणी में जा सकता है?
हाँ। सत्यापित दक्षता और काम की प्रकृति के आधार पर श्रेणी बदली जा सकती है। मंज़ूरी कार्यक्रम अधिकारी देते हैं, और हर बदलाव का सिस्टम में ऑडिट ट्रेल बनता है। मजदूर की पहचान एक ही रहती है।
हाजिरी कैसे लगेगी?
NMMS ऐप में फेस ऑथेंटिकेशन से, कार्यस्थल पर ही। हाजिरी का रिकॉर्ड जियो-टैग और टाइम-स्टैंप के साथ दर्ज होता है। ऑथेंटिकेशन फेल होने पर निर्धारित अपवाद व्यवस्था अपनाई जाती है।
क्या ब्लॉक से बाहर काम मिल सकता है?
नहीं। कुशल/अर्धकुशल मजदूर अपनी ग्राम पंचायत या उसी ब्लॉक की दूसरी ग्राम पंचायतों में लगाए जा सकते हैं, पर ब्लॉक की सीमा से बाहर किसी भी हाल में नहीं।
क्या दूर के कार्यस्थल पर यात्रा भत्ता मिलेगा?
नहीं। अगर कार्यस्थल निवास से 5 किमी के दायरे से बाहर है, तो कुशल/अर्धकुशल मजदूरों और मेट को यात्रा भत्ता (TA) देय नहीं होगा।
काम की नाप कब तक होगी?
e-मस्टर रोल बंद होने के तीन दिन के भीतर, अधिकृत तकनीकी कर्मचारी द्वारा, और रिकॉर्ड डिजिटल रूप से दर्ज होगा।
मजदूरी खाते में कैसे आएगी?
VB-G RAM G Soft में FTO बनता है, जो राज्य IFMIS को जाता है और फिर DBT-SPARSH ढाँचे (PFMS, RBI, NPCI) से सीधे मजदूर के बैंक खाते में जमा होता है। लेनदेन रिजेक्ट होने पर उसे दोबारा बनाकर प्रोसेस किया जाता है।
क्या दोबारा e-KYC कराना पड़ेगा?
नहीं। अगर अकुशल मजदूर के रूप में वैध e-KYC पहले से है, तो सिस्टम सत्यापन के बाद वही कुशल/अर्धकुशल श्रेणी के लिए मान्य रहेगा।
स्रोत
ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार — “Standard Operating Procedure: Identification, Deployment, Attendance and Wage Payment of Skilled and Semi-Skilled Workers, including Mates, under VB–G RAM G”; VB-G RAM G अधिनियम, 2025।
लेखक: सरिता मिश्रा
लेखक: सरिता मिश्रा — सरिता “सरकारी योजना” की मुख्य लेखिका हैं। वे केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं पर शोध करके उन्हें आसान हिंदी में समझाती हैं, ताकि हर आम परिवार ज़रूरी जानकारी आसानी से समझ सके। हर लेख आधिकारिक स्रोतों (PIB, मंत्रालय की वेबसाइट और सरकारी पोर्टल) से जाँचने के बाद ही प्रकाशित किया जाता है।



