📌 अपडेट: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने MGNREGA के अंतर्गत मध्यप्रदेश में “एक बगिया मां के नाम” परियोजना शुरू की — 15 अगस्त से 15 सितंबर तक चलने वाले इस अभियान में 30,000 से अधिक SHG महिलाओं की निजी भूमि पर 30 लाख से अधिक फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं।
एक बगिया मां के नाम मध्यप्रदेश सरकार की एक योजना है, जो MGNREGA (महात्मा गांधी नरेगा) के अंतर्गत चलती है। इसके तहत Self-Help Group (SHG) से जुड़ी महिलाएं — जिनके पास 0.5 से 1 एकड़ निजी भूमि है — अपनी ज़मीन पर फलदार बगीचा (orchard) लगा सकती हैं। पौधे, खाद, फेंसिंग और 50,000 लीटर का जलकुंड बनाने का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाती है। हर Block में कम से कम 100 लाभार्थियों का चयन “एक बगिया मां के नाम” App के through होता है।
Table of Contents
एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | एक बगिया मां के नाम (Ek Bagiya Maa Ke Naam) |
| राज्य | मध्यप्रदेश |
| शुरुआत | 15 अगस्त (Independence Day) |
| अवधि | 15 अगस्त से 15 सितंबर |
| Parent Scheme | MGNREGA (महात्मा गांधी नरेगा) |
| शुरू किया | CM डॉ. मोहन यादव |
| पात्र भूमि | 0.5 से 1 एकड़ (निजी) |
| लाभार्थी | SHG से जुड़ी महिलाएं |
| कुल लाभार्थी (Target) | 30,000+ महिलाएं |
| कुल पौधे (Target) | 30 लाख+ फलदार पौधे |
| न्यूनतम लाभार्थी प्रति Block | 100 |
| Selection Mode | “एक बगिया मां के नाम” App |
| क्या-क्या मिलता है | पौधे + खाद + फेंसिंग + 50,000 लीटर जलकुंड |
एक बगिया मां के नाम क्या है — और इसके पीछे की सोच?
मध्यप्रदेश सरकार ने महिलाओं को सशक्त बनाने और sustainable agriculture को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह परियोजना शुरू की — जिसके तहत SHG महिलाओं की निजी भूमि पर बाग (orchards) विकसित किए जाएंगे।
नाम पर ध्यान दें — “एक बगिया मां के नाम।” यह सिर्फ एक tagline नहीं, बल्कि scheme का core philosophy है। हर बगीचा किसी महिला (अक्सर परिवार की मां/दादी) के नाम पर registered होगा — यानी ज़मीन भले परिवार की हो, बगीचे का स्वामित्व और उससे होने वाली आय महिला के नाम जुड़ी रहेगी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे MGNREGA के अंतर्गत launch किया — और यह जोड़ने वाली बात महत्वपूर्ण है। MGNREGA सामान्यतः rural employment guarantee के लिए जाना जाता है (मज़दूरी के बदले काम), लेकिन यहाँ उसी framework का उपयोग asset creation के लिए हो रहा है — महिला की निजी ज़मीन पर एक स्थायी, income-generating asset (फलदार बगीचा) बनाना।
UPSC/MPPSC Perspective: यह योजना तीन बड़े themes को जोड़ती है — Women Empowerment (आर्थिक स्वायत्तता), Environmental Sustainability (वृक्षारोपण, हरियाली) और MGNREGA का Innovative Use (Wage Employment से Asset Creation की तरफ)। यह VB-G RAM G में “Livelihood Category” works के साथ भी वैचारिक रूप से मिलती है — जहाँ rural employment guarantee scheme सिर्फ रोज़गार नहीं, स्थायी संपत्ति भी बनाती है।
क्या-क्या मिलता है — पूरी सूची
15 अगस्त-15 सितंबर तक चलने वाली इस परियोजना में महिलाओं को पौधे, खाद, फेंसिंग तथा 50,000 लीटर जलकुंड निर्माण के लिए राशि दी जाती है।
| Item | विवरण |
|---|---|
| फलदार पौधे | आम, अमरूद, नींबू, आंवला जैसे फलदार प्रजातियां — पूरी तरह free |
| खाद (Fertilizer) | शुरुआती और maintenance दोनों के लिए |
| फेंसिंग (Fencing) | पौधों को जानवरों से बचाने के लिए — wire fencing |
| जलकुंड (Water Tank) | 50,000 लीटर क्षमता — सिंचाई के लिए |
इस योजना के माध्यम से महिलाएं अपनी ज़मीन पर फलदार पौधों का बगीचा लगा सकेंगी, जिसकी पूरी लागत राज्य सरकार उठाएगी।
कुछ media reports में इस सहायता को ₹3 लाख तक बताया गया है — हालांकि exact amount प्रति लाभार्थी, ज़मीन के आकार और पौधों की संख्या के अनुसार variable हो सकता है। Application के समय अपने Block के NRLM/Panchayat office से confirm करें।
पात्रता — कौन Apply कर सकता है?
केवल 0.5 से 1 एकड़ भूमि वाली महिलाएं ही इस परियोजना में भाग लेने के लिए पात्र हैं।
पात्रता की शर्तें:
| शर्त | विवरण |
|---|---|
| निवास | मध्यप्रदेश की ग्रामीण महिला |
| SHG Membership | DAY-NRLM के तहत Self-Help Group से जुड़ी हुई |
| भूमि का स्वामित्व | निजी भूमि — 0.5 एकड़ से 1 एकड़ के बीच |
| भूमि का प्रकार | खेती योग्य, बगीचा लगाने के लिए उपयुक्त |
ध्यान दें: यह सीमा दोनों तरफ है — आधे एकड़ से कम या 1 एकड़ से ज़्यादा भूमि वाली महिलाएं इस specific परियोजना के लिए पात्र नहीं हैं। यह सीमा छोटे और सीमांत भूमिधारकों को target करने के लिए तय की गई है।
Selection कैसे होता है? — “एक बगिया मां के नाम” App
परियोजना का लाभ लेने वाली महिलाओं का चयन “एक बगिया मां के नाम” App से किया जाता है — जिसे मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विकसित किया गया है।
हर Block में न्यूनतम 100 हितग्राहियों का चयन किया जाता है — यानी selection एक centralized, App-based process है, walk-in application नहीं।
Apply कैसे करें? — Step-by-Step
Step 1: अपने नज़दीकी Gram Panchayat या NRLM (National Rural Livelihood Mission) Office से संपर्क करें
Step 2: अपने SHG की membership confirm करें — अगर अभी SHG से नहीं जुड़ी हैं, तो पहले SHG join करें
Step 3: अपनी ज़मीन के documents (0.5-1 एकड़ की पुष्टि के साथ) तैयार रखें
Step 4: “एक बगिया मां के नाम” App पर पंजीयन के लिए जानकारी दें — यह काम अक्सर Panchayat/NRLM staff करते हैं
Step 5: App-based selection में चुने जाने पर — पौधे, खाद, फेंसिंग और जलकुंड निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी
सुझाव: आवेदन जल्दी करें — सीटें सीमित हैं (प्रति Block 100)। सभी दस्तावेज़ पहले से तैयार रखें। ज़रूरत हो तो Panchayat या NRLM कार्यालय से संपर्क करें।
ज़रूरी दस्तावेज
- आधार कार्ड
- SHG Membership Proof
- भूमि के दस्तावेज (खसरा/खतौनी — 0.5-1 एकड़ दर्शाते हुए)
- बैंक पासबुक
- पासपोर्ट साइज़ फोटो
- मोबाइल नंबर
इस योजना से महिलाओं को क्या फायदा होगा? — लंबी अवधि की सोच
यह योजना सिर्फ एक बार का लाभ नहीं — एक दीर्घकालिक आय का स्रोत बनाने की कोशिश है। फलदार पौधे लगने के 3-5 साल बाद फल देना शुरू करते हैं, और एक बार लगने के बाद सालों-साल आय देते रहते हैं।
- दीर्घकालिक आय — आम, अमरूद जैसे फल हर साल बिकते हैं
- महिला के नाम संपत्ति — बगीचे का मालिकाना हक महिला के नाम
- पर्यावरण लाभ — हरियाली बढ़ने से climate और soil health बेहतर होता है
- MGNREGA का सदुपयोग — wage employment के साथ एक स्थायी asset भी बनता है
- SHG Network को मज़बूती — Lakhpati Didi जैसी अन्य women-centric schemes से synergy
संबंधित योजनाएं
- लखपति दीदी योजना 2026 →
- नमो ड्रोन दीदी योजना →
- राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन 2026 →
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
एक बगिया मां के नाम योजना क्या है?
मध्यप्रदेश सरकार की MGNREGA-आधारित योजना है, जिसके तहत SHG महिलाओं की 0.5-1 एकड़ निजी भूमि पर फलदार बगीचा लगाया जाता है — पौधे, खाद, फेंसिंग और जलकुंड सरकार देती है।
कौन Eligible है?
मध्यप्रदेश की वे ग्रामीण महिलाएं जो SHG (Self-Help Group) से जुड़ी हैं और जिनके पास 0.5 से 1 एकड़ निजी भूमि है।
यह योजना किस अवधि में चलती है?
15 अगस्त से 15 सितंबर — Independence Day से शुरू होने वाला एक मौसमी अभियान (वृक्षारोपण के अनुकूल समय)।
कुल कितनी महिलाओं को लाभ मिलेगा?
30,000 से अधिक SHG महिलाओं को, जिनकी ज़मीन पर 30 लाख से अधिक फलदार पौधे लगाए जाएंगे।
Selection कैसे होता है?
“एक बगिया मां के नाम” App के through — हर Block में न्यूनतम 100 हितग्राहियों का चयन।
क्या पूरी लागत सरकार उठाती है?
हाँ — पौधे, खाद, फेंसिंग और 50,000 लीटर के जलकुंड निर्माण की पूरी लागत राज्य सरकार उठाती है।
इसे किसने शुरू किया?
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने MGNREGA के अंतर्गत शुरू किया।
क्या 2 एकड़ ज़मीन वाली महिला Apply कर सकती है?
नहीं। पात्रता सीमा 0.5 से 1 एकड़ के बीच है — इससे कम या ज़्यादा भूमि वाली महिलाएं इस specific परियोजना के लिए eligible नहीं हैं।
Apply कहाँ करें?
अपनी Gram Panchayat या NRLM (National Rural Livelihood Mission) Office से संपर्क करें — SHG membership और land documents के साथ।
बगीचे का मालिकाना हक किसका होगा?
योजना का नाम ही दर्शाता है — बगीचा महिला (मां) के नाम पर registered होता है, परिवार में किसी और के नाम नहीं।
आधिकारिक स्रोत
- मध्यप्रदेश सरकार — mp.gov.in
- MGNREGA (महात्मा गांधी नरेगा) Implementation Guidelines, MP
- Drishti IAS — State PCS Current Affairs
Sarita Mishra is the founder and chief author of Sarakari Yojna, India’s
Hindi-language hub for government welfare schemes. With 17+ years of
experience researching central and state government programs, she
specializes in rural development schemes, pension programs, farmer
welfare initiatives, and women’s empowerment policies. All articles on
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ministry notifications, and gazette publications.
