📌 अपडेट: 25 नवंबर 2024 को Cabinet ने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) को 15वें वित्त आयोग की अवधि (2025-26) तक एक standalone केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में मंजूरी दी। 23 अगस्त 2025 को यह मिशन launch हुआ — और अब यह खेत बचाओ अभियान जैसे दूसरे कृषि initiatives के साथ मिलकर काम कर रहा है।
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की एक standalone scheme है, जिसे 25 नवंबर 2024 को Cabinet की मंजूरी मिली। इसका मकसद है रसायन-मुक्त, eco-system आधारित खेती को मिशन मोड में बढ़ावा देना — जिसमें देसी गाय जैसे local livestock को खेती से जोड़ा जाता है। ₹2,481 करोड़ के total outlay (केंद्र: ₹1,584 करोड़, राज्य: ₹897 करोड़) से 15,000 cluster बनेंगे — हर cluster एक Gram Panchayat के बराबर — और 7.5 लाख हेक्टेयर भूमि व 1 करोड़ किसान इससे जुड़ेंगे।
Table of Contents
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) |
| Cabinet Approval | 25 नवंबर 2024 |
| Launch | 23 अगस्त 2025 |
| Scheme Type | Standalone Centrally Sponsored Scheme |
| नोडल मंत्रालय | कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय |
| कुल परिव्यय | ₹2,481 करोड़ (15वें वित्त आयोग तक, 2025-26) |
| केंद्र का हिस्सा | ₹1,584 करोड़ |
| राज्य का हिस्सा | ₹897 करोड़ |
| Target Clusters | 15,000 (Gram Panchayat-level) |
| Target Area | 7.5 लाख हेक्टेयर |
| Target Farmers | 1 करोड़ |
| Implementation Period | अगले 2 वर्ष |
| Training Agencies | MANAGE और NCONF |
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) क्या है — और यह अचानक क्यों आया?
अगर आप किसान हैं, तो शायद आपने “जैविक खेती” और “ZBNF (Zero Budget Natural Farming)” जैसे नाम पहले भी सुने होंगे — 2019-20 से Bhartiya Prakritik Krishi Paddhati (BPKP) के तहत कुछ pilot projects चल रहे थे, खासकर गंगा किनारे के इलाकों में।
NMNF इन्हीं छोटे प्रयासों को एक बड़े, राष्ट्रीय ढांचे में बदलने का नतीजा है। नवंबर 2024 में Cabinet ने इसे एक अलग, standalone scheme का दर्जा दिया — पहले जो pilot programmes अलग-अलग चल रहे थे, अब वे सब इसी मिशन के umbrella के नीचे आ गए हैं।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे launch करते हुए कहा कि मिशन का उद्देश्य सभी के लिए सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है — और साथ ही किसानों की खेती की लागत घटाना, बाहरी संसाधनों (chemical fertilizers, pesticides) पर निर्भरता कम करना।
यहाँ एक सवाल उठना लाज़मी है — आखिर “प्राकृतिक खेती” को “रासायनिक खेती छोड़ो” से कैसे अलग समझें? जवाब है — NMNF सिर्फ “मत डालो” नहीं कहता, बल्कि एक पूरा वैकल्पिक system देता है: देसी गाय का गोबर-गोमूत्र आधारित inputs, विविध फसल प्रणाली (Diverse Cropping Systems), और local agro-ecological knowledge।
UPSC Perspective: NMNF, SDG-2 (Zero Hunger), SDG-3 (Good Health), SDG-13 (Climate Action) और SDG-15 (Life on Land) — चार goals को एक साथ touch करता है। यह “खेत बचाओ अभियान” (जो मिट्टी की उर्वरता और संतुलित खाद पर केंद्रित है) का logical विस्तार है — दोनों मिलकर “Soil Health → Sustainable Inputs → Farmer Income” की chain बनाते हैं।
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) का Target — संख्याओं में समझें
| Metric | संख्या |
|---|---|
| Clusters (Gram Panchayat-level) | 15,000 |
| कुल क्षेत्र | 7.5 लाख हेक्टेयर |
| लाभार्थी किसान | 1 करोड़ |
| Implementation Timeline | 2 वर्ष |
| Krishi Sakhi Training Target | 50,000 |
15,000 clusters में से प्रत्येक एक Gram Panchayat के बराबर माना गया है — यानी यह सीधे ground-level governance structure (PAI, VB-G RAM G के समान) से जुड़ता है।
किन राज्यों को प्राथमिकता मिलेगी?
मिशन उन क्षेत्रों को प्राथमिकता देगा जहाँ प्राकृतिक खेती पहले से प्रचलित है — जैसे आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और झारखंड।
इसका तर्क सीधा है — जहाँ किसान पहले से इस पद्धति से कुछ-कुछ परिचित हैं, वहाँ scale-up करना आसान होगा बजाय वहाँ शुरू करने के जहाँ बिल्कुल नई शुरुआत करनी पड़े।
Krishi Sakhi — मिशन की रीढ़
50,000 कृषि सखियों को training देने का लक्ष्य है — ताकि उन्हें National Centre for Organic and Natural Farming (NCONF) की तरफ से चरणबद्ध तरीके से certificate मिल सके।
Krishi Sakhi का role क्या है? सोचिए — हर 15,000 clusters में किसी local महिला को training देकर “Master Trainer” बनाना, जो अपने ही गांव के किसानों को natural farming की techniques सिखाए। यह approach Drone Didi और Lakhpati Didi में देखे गए women-led implementation model से काफी मिलता है — सरकारी मिशन को ground पर एक चेहरा देना, जिससे किसान भरोसा कर सकें।
📄 नमो ड्रोन दीदी योजना — Women-led Implementation का दूसरा उदाहरण →
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) के मुख्य Components
1. Master Trainers और “चैंपियन” किसान
कृषि मंत्रालय MANAGE (National Institute of Agricultural Extension Management) और NCONF (National Centre for Organic and Natural Farming) के through Master Trainers, “Champion” किसानों और पहले से Natural Farming कर रहे किसानों को बड़े पैमाने पर training दे रहा है।
2. Bio-Input Resource Centres (BRCs)
Natural Farming में सबसे बड़ी practical challenge होती है — gobar-based inputs (जीवामृत, बीजामृत) को बड़ी मात्रा में और consistently बनाना। BRCs इसी ज़रूरत को पूरा करने के लिए हर cluster में बनाए जाएंगे — जहाँ किसान आसानी से ये inputs खरीद सकें, खुद बनाने की मेहनत और uncertainty से बच सकें।
3. Simple Certification System और Common Branding
किसानों को अपने प्राकृतिक कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंच प्रदान करने के लिए एक आसान, सरल certification प्रणाली और समर्पित common branding दी जाएगी।
यह हिस्सा शायद सबसे ज़्यादा practically उपयोगी है — क्योंकि “जैविक” या “natural” लिखकर बेचने के लिए अब तक की certification processes अक्सर महंगी और complicated होती थीं, छोटे किसानों के लिए access से बाहर।
4. छात्रों की भागीदारी
Rural Agricultural Work Experience (RAWE) कार्यक्रम और Natural Resources पर dedicated graduate, postgraduate और diploma courses के माध्यम से students को मिशन में शामिल किया जाएगा।
5. GOBARdhan और BPKP का Integration
इस initiative में Bhartiya Prakritik Krishi Paddhati (BPKP) और GOBARdhan Mission जैसी पुरानी योजनाओं को एकीकृत किया गया है — ताकि Zero Budget Natural Farming (ZBNF) और अन्य locally-adapted methods को बढ़ावा मिले।
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) से किसान को क्या फायदा होगा? — सीधी भाषा में
- खेती की लागत घटेगी — बाहर से खरीदे जाने वाले chemical fertilizers और pesticides पर खर्च कम होगा
- मिट्टी स्वस्थ होगी — स्वस्थ मृदा पारितंत्र (Soil Ecosystem) का निर्माण और रखरखाव, जैव विविधता को बढ़ावा
- Market Access बढ़ेगा — Simple certification + common branding से प्राकृतिक उत्पादों को बेचना आसान होगा
- Training नज़दीक मिलेगी — Krishi Sakhi और cluster-level support से सीखना आसान
- Inputs आसानी से मिलेंगे — Bio-Input Resource Centres से जीवामृत/बीजामृत जैसे inputs खरीदे जा सकेंगे
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) और खेत बचाओ अभियान — क्या Connection है?
जून 2026 में launch हुआ “खेत बचाओ अभियान” मिट्टी की सेहत और संतुलित उर्वरक उपयोग पर ज़ोर देता है — और NMNF इसका next logical step है। एक तरफ खेत बचाओ अभियान बताता है “रासायनिक खाद कम करो, मिट्टी जांच कराओ”, दूसरी तरफ NMNF बताता है “अगर रासायनिक खाद कम करनी है, तो इसका विकल्प क्या होगा — और कैसे अपनाएं।”
| खेत बचाओ अभियान | NMNF | |
|---|---|---|
| Focus | संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी जांच | रसायन-मुक्त वैकल्पिक खेती पद्धति |
| Approach | Awareness + Field Teams | Cluster-based Training + Infrastructure |
| Budget | अलग से | ₹2,481 करोड़ |
| Timeline | 30 जून तक (initial phase) | 2 वर्ष (15,000 clusters) |
संबंधित योजनाएं
- खेत बचाओ अभियान 2026 →
- नमो ड्रोन दीदी योजना →
- लखपति दीदी योजना 2026 →
- किसान क्रेडिट कार्ड योजना 2026 →
- पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (PAI) 2026 →
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) क्या है?
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की एक standalone scheme — जिसका मकसद रसायन-मुक्त, eco-system आधारित खेती को मिशन मोड में बढ़ावा देना है।
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) को कब मंजूरी मिली और कब launch हुआ?
Cabinet Approval 25 नवंबर 2024 को मिली, और इसे 23 अगस्त 2025 को launch किया गया।
NMNF का कुल बजट कितना है?
₹2,481 करोड़ — 15वें वित्त आयोग की अवधि (2025-26) तक, जिसमें केंद्र का हिस्सा ₹1,584 करोड़ और राज्य का हिस्सा ₹897 करोड़ है।
NMNF के तहत कितने किसान जुड़ेंगे?
1 करोड़ किसान, 7.5 लाख हेक्टेयर भूमि और 15,000 Gram Panchayat-level clusters के माध्यम से।
Krishi Sakhi का क्या role है?
50,000 Krishi Sakhis को training दी जाएगी, जिनका certification NCONF करेगा — वे अपने cluster में किसानों को natural farming techniques सिखाएंगी।
कौन से राज्यों को प्राथमिकता मिलेगी?
आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और झारखंड — जहाँ प्राकृतिक खेती पहले से प्रचलित है।
Bio-Input Resource Centres (BRCs) क्या हैं?
हर cluster में बनने वाले केंद्र जहाँ किसान जीवामृत, बीजामृत जैसे natural farming inputs आसानी से खरीद सकें।
NMNF और जैविक खेती (Organic Farming) में क्या फर्क है?
NMNF, BPKP (Bhartiya Prakritik Krishi Paddhati) पर आधारित है — जिसमें local livestock (देसी गाय) और diverse cropping integration core element हैं, सिर्फ chemical-free होना ही पर्याप्त नहीं।
Certification कैसे मिलेगा?
मिशन के तहत एक सरल certification प्रणाली और common branding दी जाएगी, जिससे किसान अपने उत्पाद बाज़ार में बेच सकें।
NMNF, GOBARdhan Mission से कैसे जुड़ा है?
NMNF में GOBARdhan Mission और BPKP जैसी पुरानी योजनाओं को एकीकृत किया गया है — ताकि integrated approach से natural farming को बढ़ावा मिले।
आधिकारिक स्रोत
- PIB — Cabinet Approval, 25 नवंबर 2024
- कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
- MANAGE और NCONF
Sarita Mishra is the founder and chief author of Sarakari Yojna, India’s
Hindi-language hub for government welfare schemes. With 17+ years of
experience researching central and state government programs, she
specializes in rural development schemes, pension programs, farmer
welfare initiatives, and women’s empowerment policies. All articles on
this site are based on official sources including PIB press releases,
ministry notifications, and gazette publications.

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