30 जून 2026 — ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) ने VB-G RAM G के तहत फंड रिलीज की अंतरिम वित्तीय व्यवस्था को लेकर सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश जारी कर दिया है (आदेश संख्या J-11060/1/2026-RE-V, दिनांक 30.06.2026)। 1 जुलाई 2026 से MGNREGA की जगह VB-G RAM G लागू हो रहा है, और इसी के साथ केंद्र से राज्यों को पैसा भेजने का पूरा सिस्टम बदल गया है। नीचे पूरी जानकारी आसान भाषा में दी गई है।
VB-G RAM G में फंड चार कंपोनेंट (मजदूरी, मटेरियल, प्रशासनिक और सोशल ऑडिट) में बंटकर रिलीज होगा। केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 60:40 (आम राज्य), 90:10 (पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्य – उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर) और 100:0 (बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश) रहेगी। पहली किस्त राज्यों की Q2 (जुलाई–सितंबर) माँग के आधार पर मिलेगी, और अगली किस्त तभी जब राज्य उस कंपोनेंट में कम-से-कम 75% फंड खर्च कर ले।
Table of Contents
VB-G RAM G फंडिंग पैटर्न एक नजर में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) – VB-G RAM G |
| लागू होने की तारीख | 1 जुलाई 2026 |
| किसकी जगह आई | MGNREGA (मनरेगा) |
| रोज़गार गारंटी | 125 दिन (पहले 100 दिन) |
| FY 2026-27 केंद्रीय आवंटन | ₹95,692.31 करोड़ |
| केंद्र-राज्य अनुपात | 60:40 / 90:10 / 100:0 |
| मजदूरी भुगतान प्लेटफॉर्म | DBT-SPARSH |
| मटेरियल/प्रशासनिक/SAU | SNA-SPARSH |
| प्रशासनिक खर्च की सीमा | कुल (मजदूरी+मटेरियल) का 9% तक |
| मनरेगा डेटा एंट्री की अंतिम तारीख | 10 जुलाई 2026 |
| आदेश जारीकर्ता | ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार |
VB-G RAM G क्या है और कब से लागू हुआ?
VB-G RAM G यानी विकसित भारत – गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अब देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोज़गार योजना बन चुका है। यह VB-G RAM G एक्ट, 2025 के तहत 1 जुलाई 2026 से पूरे ग्रामीण भारत में लागू हो गया है और इसने 2005 से चली आ रही मनरेगा की जगह ले ली है।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब हर ग्रामीण परिवार को साल में 125 दिन के काम की गारंटी मिलेगी, जो पहले 100 दिन थी। साथ ही फंडिंग का तरीका भी पूरी तरह बदल गया है — पुराने “लेबर बजट” मॉडल की जगह अब नॉर्मेटिव एलोकेशन मॉडल आ गया है, जिसमें केंद्र तय मापदंडों के आधार पर हर राज्य का हिस्सा तय करेगा।
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इस लेख में हम सिर्फ पैसे वाले हिस्से पर बात करेंगे — यानी फंड कैसे रिलीज होगा, केंद्र-राज्य की हिस्सेदारी क्या है, और राज्यों को किन डेडलाइन का ध्यान रखना है।
अंतरिम वित्तीय व्यवस्था क्यों लाई गई?
योजना के नियम (Rules) अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुए हैं — इन्हें राज्यों की राय लेने के लिए सार्वजनिक किया गया है। विस्तृत वित्तीय परिचालन दिशानिर्देश (Financial Operational Guidelines) नियमों के फाइनल होने के बाद अलग से जारी होंगे।
लेकिन योजना तो 1 जुलाई से शुरू हो रही है। इसलिए ताकि शुरुआती किस्तें समय पर निकल सकें और काम न रुके, मंत्रालय ने बीच का रास्ता निकालते हुए यह अंतरिम व्यवस्था लागू की है। यह व्यवस्था तब तक चलेगी जब तक पक्के वित्तीय दिशानिर्देश जारी नहीं हो जाते।
फंड रिलीज कैसे होगा? (Release Pattern)
फंड रिलीज का तरीका इस बार काफी अनुशासित रखा गया है:
- पहली किस्त: राज्यों की Q2 (जुलाई–सितंबर 2026) की माँग और अंतरिम आवंटन के आधार पर जारी होगी।
- अगली किस्त की शर्त: राज्य तभी अगली किस्त माँग सकता है जब वह उस कंपोनेंट में मिले कुल केंद्रीय फंड का कम-से-कम 75% खर्च कर ले। खर्च का हिसाब PFMS रिपोर्ट से साबित करना होगा।
- आगे की समीक्षा: दूसरी और बाद की किस्तों में मंत्रालय राज्य की भौतिक-वित्तीय प्रगति, खर्च की रफ्तार और क्षमता देखकर ही पैसा देगा। इसके लिए UC (Utilization Certificate) और ऑडिटेड स्टेटमेंट जैसे दस्तावेज भी देखे जाएँगे।
सीधी बात — जो राज्य पैसा समय पर और सही तरीके से खर्च करेगा, उसे ही आगे पैसा मिलेगा।
केंद्र-राज्य फंडिंग पैटर्न (सबसे ज़रूरी हिस्सा)
VB-G RAM G एक्ट की धारा 22 के अनुसार केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी इस तरह तय की गई है:
| कंपोनेंट | पेमेंट प्लेटफॉर्म | आम राज्य/UT | पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्य | बिना विधानसभा वाले UT |
|---|---|---|---|---|
| मजदूरी (Wage) | DBT-SPARSH | 60 : 40 | 90 : 10 | 100 : 0 (NeFMS से) |
| मटेरियल (Material) | SNA-SPARSH | 60 : 40 | 90 : 10 | 100 : 0 (LoA से) |
| प्रशासनिक (Admin) | SNA-SPARSH | 60 : 40 | 90 : 10 | 100 : 0 (LoA से) |
ध्यान दें: 90:10 वाला अनुपात पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी राज्यों और उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश व जम्मू-कश्मीर पर लागू होता है। एक और अहम बात — अगर कोई राज्य अपने अंतरिम आवंटन से ज़्यादा खर्च करता है, तो वह अतिरिक्त खर्च राज्य को खुद उठाना होगा।
चार कंपोनेंट और उनका पेमेंट सिस्टम
VB-G RAM G में पैसा चार अलग-अलग खानों (कंपोनेंट) में चलेगा, और हर एक का अपना सिस्टम है:
- मजदूरी कंपोनेंट (Wage) — मज़दूरों के खाते में सीधे DBT-SPARSH के ज़रिए पैसा जाएगा। इसके लिए APBS/NPCI रूटिंग और आधार लिंकिंग ज़रूरी है।
- मटेरियल कंपोनेंट (Material) — काम में लगने वाले सामान का खर्च SNA-SPARSH से चलेगा।
- प्रशासनिक कंपोनेंट (Admin) — स्टाफ, निगरानी, शिकायत निवारण आदि का खर्च, SNA-SPARSH से।
- सोशल ऑडिट यूनिट (SAU) — सामाजिक अंकेक्षण के लिए अलग कंपोनेंट, SNA-SPARSH से।
हर कंपोनेंट के लिए राज्यों को RBI में अलग ड्रॉइंग अकाउंट खोलना होगा और PFMS पोर्टल में मैपिंग करनी होगी। जब तक मंत्रालय का PD Checker इस पूरी कॉन्फ़िगरेशन को मंज़ूर नहीं करता, तब तक कोई भी Fund Transfer Order (FTO) जारी नहीं हो सकेगा।
प्रशासनिक खर्च और सोशल ऑडिट की सीमा
- राज्य को मिलने वाला प्रशासनिक खर्च, कुल खर्च (मजदूरी + मटेरियल) के 9% तक ही सीमित रहेगा।
- राष्ट्रीय स्तर का प्रशासनिक खर्च पूरी तरह केंद्र उठाएगा।
- इन्हीं 9% में से 1% तक राशि राज्य की सोशल ऑडिट यूनिट (SAU) के लिए अलग रखी जाएगी — और यह 1% पूरी तरह केंद्र सरकार वहन करेगी।
यह प्रावधान दिखाता है कि सरकार पारदर्शिता और सामाजिक अंकेक्षण को कितनी अहमियत दे रही है।
₹1000 के उदाहरण से समझें (Annexure-II)
मंत्रालय ने एक आसान उदाहरण दिया है — अगर किसी राज्य को केंद्रीय हिस्से के रूप में ₹1000 मिलते हैं, तो उसका बँटवारा कुछ ऐसा होगा:
| कंपोनेंट | राशि (₹) |
|---|---|
| मजदूरी (Wage) | 550.46 |
| मटेरियल (Material) | 366.97 |
| प्रशासनिक खर्च (9%) | 82.57 |
| कुल | 1000.00 |
इसी अनुपात में राज्य अपनी हिस्सेदारी (60:40 या 90:10) जोड़कर बजट की तैयारी कर सकते हैं।
मनरेगा के पुराने भुगतान: ये डेडलाइन मत भूलिए
यह हिस्सा खासकर ग्राम पंचायत सचिवों, रोज़गार सेवकों और ब्लॉक अधिकारियों के लिए बहुत ज़रूरी है:
- 30 जून 2026 तक बंद हुए मस्टर रोल के लंबित FTO अपलोड करने के लिए मनरेगा डेटा एंट्री मॉड्यूल 10 जुलाई 2026 तक खुला रहेगा।
- सभी लंबित SNA-SPARSH ट्रांज़ैक्शन के क्रेडिट रिस्पांस भी 10 जुलाई 2026 तक NREGASoft में देने होंगे।
- इसके बाद NREGASoft बंद कर दिया जाएगा। जो ट्रांज़ैक्शन समय पर रिकॉन्साइल नहीं हुए, वे आगे प्रोसेस नहीं हो पाएँगे।
इसलिए जिन पंचायतों/ब्लॉकों के पुराने भुगतान बाकी हैं, वे 10 जुलाई से पहले हर हाल में निपटा लें।
राज्यों को क्या तैयारी करनी है?
मंत्रालय ने राज्यों से माँगा है कि वे जल्द से जल्द भेजें:
- तिमाही-वार (Q2, Q3, Q4) केंद्रीय फंड की ज़रूरत, कंपोनेंट और श्रेणी (SC/ST/अन्य) के हिसाब से।
- राज्य के हिस्से (State Share) के लिए किए गए बजट प्रावधान।
- मनरेगा के चालू कामों को समय पर पूरा करने का एक्शन प्लान — जिसमें समय-सीमा, सत्यापन, निगरानी और NREGASoft में स्थिति अपडेट करना शामिल हो।
यह जानकारी इसलिए ज़रूरी है ताकि मंत्रालय पहली किस्त समय पर रिलीज कर सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
VB-G RAM G कब से लागू हुआ?
VB-G RAM G पूरे ग्रामीण भारत में 1 जुलाई 2026 से लागू हो गया है और इसने मनरेगा की जगह ली है।
VB-G RAM G में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी कितनी है?
उ. आम राज्यों के लिए 60:40, पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्यों (उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर) के लिए 90:10, और बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 100:0 का अनुपात है।
फंड की पहली किस्त कैसे मिलेगी?
पहली किस्त राज्यों की Q2 (जुलाई–सितंबर) की फंड माँग के आधार पर जारी होगी। अगली किस्त के लिए कम-से-कम 75% फंड खर्च करना ज़रूरी है।
मनरेगा के पुराने भुगतान कब तक हो सकते हैं?
30 जून 2026 तक बंद मस्टर रोल के लंबित FTO के लिए डेटा एंट्री मॉड्यूल 10 जुलाई 2026 तक खुला रहेगा।
मजदूरी का भुगतान किस सिस्टम से होगा?
मजदूरी का भुगतान DBT-SPARSH के ज़रिए सीधे मज़दूर के बैंक/डाकघर खाते में होगा, जबकि मटेरियल, प्रशासनिक और सोशल ऑडिट का खर्च SNA-SPARSH से चलेगा।
प्रशासनिक खर्च की सीमा कितनी है?
प्रशासनिक खर्च कुल (मजदूरी+मटेरियल) के 9% तक सीमित है, जिसमें से 1% तक सोशल ऑडिट यूनिट के लिए रखा जाएगा।
निष्कर्ष
VB-G RAM G सिर्फ नाम का बदलाव नहीं है — इसके साथ पैसे का पूरा सिस्टम भी नया हो गया है। राज्यों के लिए अब अनुशासन ज़रूरी है: समय पर खर्च, 75% यूटिलाइज़ेशन और सही PFMS रिपोर्टिंग ही आगे की किस्तों की चाबी है। और ग्राम पंचायत स्तर पर सबसे ज़रूरी काम है — 10 जुलाई 2026 तक मनरेगा के पुराने भुगतान निपटा लेना।
आधिकारिक स्रोत: ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार — आदेश संख्या J-11060/1/2026-RE-V, दिनांक 30.06.2026 (Interim Financial arrangements under VB-G RAM G, FY 2026-27)।
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लेखक: सरिता मिश्रा — सरिता “सरकारी योजना” की मुख्य लेखिका हैं। वे केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं पर शोध करके उन्हें आसान हिंदी में समझाती हैं, ताकि हर आम परिवार ज़रूरी जानकारी आसानी से समझ सके। हर लेख आधिकारिक स्रोतों (PIB, मंत्रालय की वेबसाइट और सरकारी पोर्टल) से जाँचने के बाद ही प्रकाशित किया जाता है।
