| 📌 अपडेट बॉक्स (11 अगस्त 2026) आधार: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173 — गृह मंत्रालय ने लोकसभा में लिखित उत्तर में स्पष्ट किया मुख्य नियम: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दी गई शिकायत (e-FIR) को दर्ज मानने के लिए शिकायतकर्ता को 3 दिन के भीतर उस पर हस्ताक्षर करना ज़रूरी है ⚠️ नोट: e-FIR के लिए कोई एक राष्ट्रीय पोर्टल नहीं है — हर राज्य पुलिस की अपनी अलग व्यवस्था है |
शुरुआत — थाने जाने से पहले जान लें ये अधिकार
चोरी, ठगी या किसी भी संज्ञेय अपराध (cognizable offence) की शिकायत के लिए अक्सर लोग सोचते हैं कि थाने जाकर ही FIR दर्ज करानी होगी। पर नए आपराधिक कानून BNSS के तहत अब शिकायत इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भी दी जा सकती है — SMS, ईमेल, WhatsApp, वेब पोर्टल या Citizen Service Centre के ज़रिए। इसे e-FIR कहा जाता है, और 11 अगस्त 2026 को खुद गृह मंत्रालय ने लोकसभा में इसके नियम स्पष्ट किए हैं।
| सीधा जवाब: BNSS की धारा 173 के तहत, किसी भी संज्ञेय अपराध की जानकारी मौखिक रूप से या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम (जैसे ईमेल, SMS, वेब पोर्टल) से थाना प्रभारी को दी जा सकती है। अगर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दी गई है, तो उसे आधिकारिक तौर पर दर्ज मानने के लिए शिकायतकर्ता को 3 दिन के भीतर उस पर हस्ताक्षर करना ज़रूरी है। ध्यान रहे, e-FIR के लिए कोई एक तय राष्ट्रीय पोर्टल नहीं है — हर राज्य पुलिस की अपनी अलग वेबसाइट/व्यवस्था होती है, इसलिए अपने राज्य पुलिस की आधिकारिक साइट पर जाकर पता करें। |
BNSS धारा 173 क्या कहती है
- संज्ञेय अपराध की जानकारी अपराध कहीं भी हुआ हो, किसी भी थाना प्रभारी को दी जा सकती है
- जानकारी मौखिक रूप से दी जा सकती है — तब पुलिस अधिकारी उसे लिखित रूप देगा और शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर लेगा
- जानकारी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम (ईमेल, SMS, WhatsApp, वेब पोर्टल) से भी दी जा सकती है
- इलेक्ट्रॉनिक शिकायत को थाना प्रभारी रिकॉर्ड पर लेगा, पर उसे आधिकारिक तौर पर दर्ज मानने के लिए शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर 3 दिन के भीतर ज़रूरी हैं
3 दिन का नियम — सबसे ज़रूरी बात जो अक्सर लोग नहीं जानते
e-FIR भेज देने भर से मामला पूरा नहीं होता — शिकायतकर्ता को 3 दिन के भीतर संबंधित थाने जाकर या तय प्रक्रिया के अनुसार अपनी शिकायत पर हस्ताक्षर करने होते हैं। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो शिकायत को आधिकारिक तौर पर दर्ज (on record) नहीं माना जाएगा। इसलिए e-FIR भेजने के बाद इस समय-सीमा को ज़रूर याद रखें।
e-FIR कैसे भेजें — सामान्य तरीके
- अपने राज्य पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट/पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें (कई राज्यों में OTP-आधारित लॉगिन के बाद शिकायत विवरण भरना होता है)
- संबंधित थाने को सीधे ईमेल भेजें
- SMS या WhatsApp के ज़रिए भी शिकायत दी जा सकती है (राज्य के अनुसार उपलब्धता अलग हो सकती है)
- नज़दीकी Citizen Service Centre (CSC) से भी सहायता ली जा सकती है
हर राज्य पुलिस की अपनी वेबसाइट/एप अलग होती है — कोई एक केंद्रीय राष्ट्रीय e-FIR पोर्टल फिलहाल मौजूद नहीं है। अपने राज्य पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर “e-FIR” या “Online Complaint” सेक्शन खोजें।
शिकायत की स्थिति कैसे ट्रैक करें
ज़्यादातर राज्य पोर्टलों पर लॉगिन करके “Track Complaint” विकल्प से देखा जा सकता है कि शिकायत किस अधिकारी के पास है और उस पर क्या कार्रवाई हुई — इसके लिए बार-बार थाने जाने या फोन करने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
Zero FIR — एक और ज़रूरी अधिकार
अगर अपराध किसी दूसरे इलाके में हुआ हो, तब भी आप किसी भी नज़दीकी थाने में जाकर FIR दर्ज करा सकते हैं — इसे “Zero FIR” कहते हैं। बाद में वो FIR सही अधिकार-क्षेत्र वाले थाने को स्थानांतरित कर दी जाती है। यानी “ये हमारे इलाके का मामला नहीं है” कहकर कोई थाना FIR दर्ज करने से मना नहीं कर सकता।
किन मामलों में e-FIR ज़्यादा उपयोगी है
- जब आरोपी की पहचान मालूम न हो (जैसे मोबाइल/सामान की चोरी)
- संज्ञेय अपराध (cognizable offence) से जुड़े मामलों में
- जब थाने जाना तुरंत संभव न हो — दूरी, समय या अन्य कारणों से
- गंभीर हिंसा या तुरंत मौके पर पुलिस चाहिए होने वाले मामलों में सीधे 112/100 पर कॉल करना ज़्यादा उपयुक्त रहता है, e-FIR की बजाय
संबंधित जानकारी
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
e-FIR क्या है?
BNSS की धारा 173 के तहत, किसी संज्ञेय अपराध की शिकायत इलेक्ट्रॉनिक माध्यम (ईमेल, SMS, वेब पोर्टल) से पुलिस को देने की सुविधा।
क्या e-FIR भेजते ही मामला दर्ज हो जाता है?
नहीं, शिकायतकर्ता को 3 दिन के भीतर उस पर हस्ताक्षर करने होते हैं, तभी वो आधिकारिक तौर पर दर्ज मानी जाती है।
e-FIR कहां भेजें?
अपने राज्य पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट, ईमेल, SMS या WhatsApp के ज़रिए — कोई एक राष्ट्रीय पोर्टल नहीं है, राज्य के अनुसार तरीका अलग होता है।
क्या e-FIR के लिए कोई फीस लगती है?
नहीं, FIR दर्ज कराना पूरी तरह मुफ़्त है।
Zero FIR क्या है?
किसी भी थाने में, चाहे अपराध वहां न हुआ हो, FIR दर्ज कराने का अधिकार — बाद में सही थाने को स्थानांतरित होती है।
क्या पुलिस e-FIR दर्ज करने से मना कर सकती है?
संज्ञेय अपराध के मामले में पुलिस FIR दर्ज करने से मना नहीं कर सकती — मना करने पर उच्च अधिकारी या अदालत से शिकायत की जा सकती है।
शिकायत की स्थिति कैसे पता करें?
ज़्यादातर राज्य पोर्टलों पर लॉगिन करके ‘Track Complaint’ सेक्शन में देखी जा सकती है।
क्या तुरंत खतरे की स्थिति में भी e-FIR भेजें?
नहीं, तुरंत खतरे या हिंसा की स्थिति में सीधे 112/100 पर कॉल करना बेहतर है।
ये नियम किस कानून के तहत है?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173 के तहत।
ये जानकारी किसने दी?
गृह मंत्रालय राज्य मंत्री श्री बंडी संजय कुमार ने 11 अगस्त 2026 को लोकसभा में लिखित उत्तर में।
लेखक: सरिता मिश्रा — सरिता “सरकारी योजना” की मुख्य लेखिका हैं। वे केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं पर शोध करके उन्हें आसान हिंदी में समझाती हैं, ताकि हर आम परिवार ज़रूरी जानकारी आसानी से समझ सके। हर लेख आधिकारिक स्रोतों (PIB, मंत्रालय की वेबसाइट और सरकारी पोर्टल) से जाँचने के बाद ही प्रकाशित किया जाता है।



