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एक नज़र में — प्रोजेक्ट उन्नति
| बिंदु | जानकारी |
| योजना का नाम | प्रोजेक्ट उन्नति (Project UNNATI) |
| शुरुआत | दिसंबर 2019 |
| मंत्रालय | ग्रामीण विकास मंत्रालय (मनरेगा प्रभाग) |
| पात्रता शर्त | परिवार ने 2018-19 से किसी भी वित्त वर्ष में 60 दिन मनरेगा काम पूरा किया हो |
| कितने सदस्य | परिवार के 2 सदस्य तक |
| प्रशिक्षण के माध्यम | DDU-GKY, RSETI, DAY-NRLM, PMKVY, PM विश्वकर्मा, राज्य कौशल कार्यक्रम |
| स्टाइपेंड | राज्य की मनरेगा मजदूरी दर पर (DDU-GKY में 100 दिन तक, बाकी 30 दिन तक) |
| खर्च | 100% केंद्र सरकार |
| लक्ष्य | 1.5 लाख (मार्च 2026 तक); 90,894 प्रशिक्षित (मार्च 2025 तक) |
| अवधि | 31 मार्च 2026 तक (अब बीत चुकी) |
प्रोजेक्ट उन्नति क्या है?
मनरेगा हर ग्रामीण परिवार को साल में 100 दिन के अकुशल काम की गारंटी देता है। लेकिन अगर परिवार हर साल सिर्फ़ इसी मजदूरी पर टिका रहे, तो आगे कैसे बढ़ेगा? इसी सोच से दिसंबर 2019 में प्रोजेक्ट उन्नति शुरू हुई।
इसका विचार सीधा है — मनरेगा परिवार के सदस्य को कोई हुनर सिखा दिया जाए, ताकि वह अकुशल मजदूरी से ऊपर उठकर स्वरोजगार या बेहतर वेतन वाली नौकरी पा सके। खास बात — उन्नति का कोई अलग कोर्स या ट्रेनिंग सेंटर नहीं है; यह पहले से चल रही कौशल योजनाओं से जोड़कर (convergence) काम करती है।
संशोधित पात्रता — क्या बदला?
अगस्त 2025 के संशोधित दिशानिर्देशों ने पात्रता को आसान बनाया। यह बदलाव जानना ज़रूरी है:
- काम के दिन: पहले 100 दिन ज़रूरी थे — अब सिर्फ़ 60 दिन।
- कौन-सा साल: 2018-19 से किसी भी वित्त वर्ष में 60 दिन पूरे किए हों (सिर्फ़ पिछले साल का बंधन नहीं)।
- कितने लोग: पहले एक सदस्य — अब परिवार के 2 सदस्य तक प्रशिक्षण ले सकते हैं।
- रजिस्ट्रेशन: आधार के ज़रिए पहचान।
- शर्त: चुने गए व्यक्ति ने केंद्र/राज्य की किसी अन्य योजना का लाभ न लिया हो; और एक व्यक्ति को सिर्फ़ एक ही प्रशिक्षण।
राहत की बात — प्रशिक्षण के बाद भी उस परिवार का मनरेगा के तहत 100 दिन काम पाने का अधिकार बना रहता है।
प्रशिक्षण कौन देता है? (2025-26)
संशोधित नियमों में प्रशिक्षण के माध्यम बढ़ाए गए — और एक हटाया भी गया (KVK)। मुख्य रूप से दो रास्ते हैं:
- मजदूरी रोजगार के लिए: DDU-GKY (दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना) — प्लेसमेंट से जुड़ी ट्रेनिंग।
- स्वरोजगार के लिए: RSETI (ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान), DAY-NRLM (आजीविका मिशन), PMKVY (प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना), PM विश्वकर्मा (18 पारंपरिक ट्रेड), और राज्य कौशल कार्यक्रम।
ध्यान दें: वित्त वर्ष 2025-26 में कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के तहत कोई प्रशिक्षण नहीं रखा गया है।
क्या-क्या लाभ मिलते हैं?
- मुफ्त प्रशिक्षण: चुने गए सदस्य को बिना फीस के हुनर सिखाया जाता है।
- स्टाइपेंड: प्रशिक्षण के दौरान राज्य की मनरेगा मजदूरी दर पर भत्ता — DDU-GKY में अधिकतम 100 दिन तक, और RSETI/PMKVY/PM विश्वकर्मा/NRLM जैसे कार्यक्रमों में अधिकतम 30 दिन तक। पूरा खर्च केंद्र सरकार का।
- भुगतान कैसे: उपस्थिति पोर्टल पर आने के बाद PO/BDO द्वारा सीधे लाभार्थी के खाते में (DBT)।
किन परिवारों को प्राथमिकता?
चयन में इस क्रम से प्राथमिकता दी जाती है (SECC अभाव सूची के आधार पर):
- अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST)
- घुमंतू और विमुक्त जनजातियाँ
- अन्य गरीबी रेखा से नीचे (BPL) परिवार
- महिला-मुखिया वाले परिवार
- दिव्यांग-मुखिया वाले परिवार
- भूमि सुधार के लाभार्थी
- पीएम आवास योजना–ग्रामीण (PMAY-G) के लाभार्थी
- वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006 के लाभार्थी
इन वर्गों के बाद, छोटे/सीमांत किसानों को भी मौका — बशर्ते वैध जॉब कार्ड हो और एक सदस्य काम को तैयार हो।
योजना की ज़मीनी हकीकत (ईमानदार बात)
कागज़ पर अच्छी दिखने वाली यह योजना ज़मीन पर रफ्तार नहीं पकड़ पाई। मार्च 2025 तक कुल 90,894 लोग ही प्रशिक्षित हुए, जबकि संशोधित लक्ष्य 1.5 लाख था (शुरुआती लक्ष्य तो 2 लाख था)। इसकी वजहें रहीं — कोविड महामारी, और कई राज्यों में कमज़ोर अमल। यही कारण है कि सरकार ने राज्यों के प्रदर्शन को उनके मनरेगा बजट से जोड़ने तक की बात कही।
अब आगे क्या? (मनरेगा से VB–G RAM G की ओर)
यह सबसे अहम सवाल है। प्रोजेक्ट उन्नति की अवधि 31 मार्च 2026 तक थी। 1 जुलाई 2026 से मनरेगा की जगह VB–G RAM G अधिनियम लागू हो गया है। चूँकि उन्नति मनरेगा से ही जुड़ी थी, इसका भविष्य अब नई व्यवस्था पर निर्भर है — और इस पर आधिकारिक स्पष्टता का इंतज़ार है।
अगर आप अभी हुनर सीखना चाहते हैं, तो ये कार्यक्रम स्वतंत्र रूप से अब भी चालू हैं और इनमें सीधे आवेदन किया जा सकता है: PMKVY, PM विश्वकर्मा, और पीएम दक्ष। नज़दीकी RSETI से भी संपर्क किया जा सकता है।
UPSC और राज्य PCS के नज़रिए से
- शुरुआत — दिसंबर 2019; मंत्रालय — ग्रामीण विकास (मनरेगा प्रभाग)।
- उद्देश्य — मनरेगा मजदूरों का कौशल बढ़ाकर अधूरे से पूर्ण रोजगार की ओर।
- मॉडल — अलग कोर्स नहीं; DDU-GKY, RSETI, NRLM, PMKVY, PM विश्वकर्मा से convergence।
- स्टाइपेंड — मनरेगा मजदूरी दर पर, 100% केंद्र वित्त-पोषित।
- मुख्य चुनौती — कम क्रियान्वयन (90,894 बनाम 1.5 लाख लक्ष्य)।
- संदर्भ — MGNREGA से VB–G RAM G में संक्रमण; GS पेपर-2 के लिए प्रासंगिक।
संबंधित योजनाएं
- मनरेगा योजना — आवेदन कैसे करें
- VB–G RAM G: 1 जुलाई 2026 से लॉन्च
- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)
- पीएम विश्वकर्मा योजना
- पीएम दक्ष योजना
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: प्रोजेक्ट उन्नति का लाभ कौन ले सकता है?
उत्तर: ऐसा मनरेगा परिवार जिसने 2018-19 से किसी भी वित्त वर्ष में 60 दिन काम पूरा किया हो — उसके 2 सदस्य तक प्रशिक्षण ले सकते हैं।
प्रश्न 2: क्या पहले 100 दिन ज़रूरी नहीं थे?
उत्तर: पहले शर्त 100 दिन की थी, लेकिन अगस्त 2025 के संशोधित नियमों में इसे घटाकर 60 दिन कर दिया गया।
प्रश्न 3: स्टाइपेंड कितना और कितने दिन?
उत्तर: राज्य की मनरेगा मजदूरी दर पर — DDU-GKY में अधिकतम 100 दिन, बाकी कार्यक्रमों में अधिकतम 30 दिन तक।
प्रश्न 4: क्या KVK में अब भी ट्रेनिंग होती है?
उत्तर: नहीं। वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित नियमों में KVK के तहत कोई प्रशिक्षण नहीं रखा गया।
प्रश्न 5: क्या यह योजना अभी चालू है?
उत्तर: इसकी अवधि 31 मार्च 2026 तक थी और आगे विस्तार की आधिकारिक पुष्टि नहीं है। साथ ही मनरेगा अब VB–G RAM G बन गया है। ताज़ा स्थिति अपने ब्लॉक/RSETI से पुष्टि करें।
प्रश्न 6: अभी हुनर सीखना हो तो क्या विकल्प हैं?
उत्तर: PMKVY, PM विश्वकर्मा, पीएम दक्ष और नज़दीकी RSETI — ये कार्यक्रम स्वतंत्र रूप से अब भी चालू हैं।
नोट: यह लेख प्रोजेक्ट उन्नति के आधिकारिक संशोधित दिशानिर्देशों (13 अगस्त 2025) और हालिया रिपोर्टों पर आधारित है। योजना की अवधि व आपके इलाके में उपलब्धता की पुष्टि के लिए अपने ब्लॉक/ग्राम पंचायत/RSETI या ग्रामीण विकास मंत्रालय की आधिकारिक सूचना देखें।
लेखक: सरिता मिश्रा — सरिता “सरकारी योजना” की मुख्य लेखिका हैं। वे केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं पर शोध करके उन्हें आसान हिंदी में समझाती हैं, ताकि हर आम परिवार ज़रूरी जानकारी आसानी से समझ सके। हर लेख आधिकारिक स्रोतों (PIB, मंत्रालय की वेबसाइट और सरकारी पोर्टल) से जाँचने के बाद ही प्रकाशित किया जाता है।
