एक जनपद एक व्यंजन योजना 2026 (ODOC) — आगरा का पेठा से बनारस की लस्सी तक 75 जिलों के व्यंजनों को Global Brand | ₹150 करोड़ बजट | उद्यमियों को 25% Grant | पूरी जानकारी

📌 अपडेट (मई 2026): 4 मई 2026 को योगी मंत्रिपरिषद ने ‘एक जनपद एक व्यंजन’ (ODOC — One District One Cuisine) योजना को मंजूरी दे दी। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए ₹150 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

‘एक जनपद एक व्यंजन’ (ODOC) योजना उत्तर प्रदेश की ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ODOP) की सफलता के बाद शुरू की गई एक नई महत्वाकांक्षी पहल है। इसका उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक जनपद के पारंपरिक एवं विशिष्ट व्यंजनों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। योजना के अंतर्गत उद्यमियों को 25% तक अनुदान (अधिकतम ₹20 लाख) दिया जाएगा और 2026-27 के बजट में ₹150 करोड़ का प्रावधान है।

Table of Contents

एक जनपद एक व्यंजन योजना एक नज़र में

विवरणजानकारी
योजना का नामएक जनपद एक व्यंजन (ODOC — One District One Cuisine)
राज्यउत्तर प्रदेश
Cabinet Approval4 मई 2026
Launch24 जनवरी 2026 — केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
नोडल विभागसूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग, UP
Parent SchemeODOP (एक जनपद एक उत्पाद) की तर्ज पर
Budget (2026-27)₹150 करोड़
उद्यमी अनुदान25% (अधिकतम ₹20 लाख)
Target जनपद75 जिले
District CommitteeDM की अध्यक्षता में — Universities, Technical Institutes, Tourism Dept.
Theme“टेस्ट ऑफ यूपी” / “स्वाद यूपी का”
GI Tagव्यंजनों को GI Tag दिलाने का प्रयास
घोषणाकर्तामंत्री राकेश सचान (MSME)

एक जनपद एक व्यंजन योजना (ODOC) क्या है — और ODOP से कैसे जुड़ा है?

जिस तरह ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) ने हस्तशिल्प और उद्योगों को पहचान दी, उसी तर्ज पर अब ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूज़ीन’ (ODOC) के जरिए हर जिले के पारंपरिक व्यंजन को ब्रांड बनाने की तैयारी पूरी हो चुकी है।

उत्तर प्रदेश में food culture की विविधता अद्वितीय है — लखनऊ की नवाबी रसोई से लेकर काशी का देसी खाना, ब्रज की मिठाइयाँ और बुंदेलखंड के पारंपरिक पकवान। लेकिन यह विविधता अभी तक सिर्फ स्थानीय थी — इसे national और international market तक पहुँचाने का कोई structured framework नहीं था।

ODOC योजना का उद्देश्य जनपदवार प्रसिद्ध व्यंजनों का चिन्हांकन कर उन्हें संरक्षित, सुरक्षित एवं मानकीकृत किया जाएगा। साथ ही उनकी गुणवत्ता सुधार, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं शेल्फ लाइफ बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

UPSC/UPPSC Perspective: ODOC, India’s “Vocal for Local” और “Brand India” narrative का food sector में extension है। यह GI (Geographical Indication) tagging mechanism के through food heritage protection का भी example बनेगा — जैसे Darjeeling Tea, Basmati Rice। Food Tourism को mainstream tourism में integrate करना — SDG-8 (Decent Work & Economic Growth) को touch करता है। इस योजना का उद्देश्य राज्य भर में क्षेत्र विशेष के व्यंजनों का दस्तावेजीकरण, ब्रांडिंग और प्रचार करना है, जिससे स्थानीय उद्यमियों, खाद्य शिल्पकारों और पर्यटन से जुड़े व्यवसायों के लिए नए अवसर पैदा हों।

जिलेवार प्रसिद्ध व्यंजन — ODOC की Food Mapping

ODOC के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों के प्रमुख पारंपरिक व्यंजनों की व्यापक मैपिंग कर ली गई है, जिससे अब हर जिले की अपनी एक खास फूड आइडेंटिटी तय हो गई है।

प्रमुख जिलों के व्यंजन:

जिलाप्रसिद्ध व्यंजन
आगरापेठा
मथुरापेड़ा
वाराणसी (बनारस)लस्सी
लखनऊमलाई मक्खन
जौनपुरइमरती
मेरठरेवड़ी-गजक
गोरखपुरसमोसे
सहारनपुरशहद
मुजफ्फरनगरगुड़

ब्रज की मिठाइयाँ, अवध की चाट-संस्कृति, पूर्वांचल का देसी स्वाद और बुंदेलखंड के पारंपरिक व्यंजन — इन सभी को एक प्लेटफॉर्म पर लाकर राज्य की खाद्य विविधता को एकजुट किया जा रहा है।

एक जनपद एक व्यंजन योजना के मुख्य Components

1. Documentation और Identification

उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले से एक विशिष्ट, ऐतिहासिक और पारंपरिक व्यंजन की पहचान की जाएगी। यह documentation आगे branding, certification और export का आधार बनेगी।

2. Quality Improvement और Standardization

जनपदवार प्रसिद्ध व्यंजनों का चिन्हांकन कर उन्हें संरक्षित, सुरक्षित एवं मानकीकृत किया जाएगा।

3. Smart Packaging और Branding

भारतीय पैकेजिंग संस्थान (IIP) जैसे संस्थानों के सहयोग से स्मार्ट पैकेजिंग, इको-फ्रेंडली पैक, QR Code, Barcode और Nutrition Labeling जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

4. GI Tag (Geographical Indication)

ODOC के तहत जिलों के खास व्यंजनों को GI Tag दिलाने के प्रयास किए जाएंगे। GI Tag मिलने से नकल और adulteration से legal protection मिलती है।

5. Food Tourism Integration

योगी सरकार ODOC को पर्यटन से जोड़कर Food Tourism को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम कर रही है। अब पर्यटक किसी जिले में जाएंगे तो वहां के प्रसिद्ध व्यंजन का अनुभव लेना भी उनकी यात्रा का हिस्सा होगा।

6. Financial Support — 25% Grant

उद्यमियों को 25 प्रतिशत तक अनुदान (अधिकतम ₹20 लाख रुपये) दिया जाएगा।

7. Training और Capacity Building

स्थानीय उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को packaging, designing, quality improvement और food processing के लिए प्रतिष्ठित संस्थानों के माध्यम से निःशुल्क प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी।

8. “स्वाद यूपी का” Global Branding

प्रदेश के प्रमुख आयोजनों में “स्वाद यूपी का” थीम के अंतर्गत व्यंजनों की विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी। साथ ही लघु फिल्मों, डिजिटल प्रचार और ब्रांडिंग अभियानों के माध्यम से लोगों को उत्तर प्रदेश के पारंपरिक स्वाद से जोड़ने की रणनीति तैयार की जा रही है।

District Level Committee — Implementation Structure

योजना के क्रियान्वयन के लिए जनपद स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी, जिसमें विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों, खाद्य विभाग एवं पर्यटन विभाग के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। यह समिति स्थानीय स्तर पर सुझाव लेकर व्यंजनों का चयन और विकास सुनिश्चित करेगी।

Committee Memberभूमिका
जिलाधिकारीअध्यक्ष
विश्वविद्यालय प्रतिनिधिAcademic support, Research
तकनीकी संस्थानStandardization, Quality
खाद्य विभागFood safety, Certification
पर्यटन विभागFood Tourism integration

लाभार्थी — किसे क्या मिलेगा?

ODOC का लाभ इन सभी को मिलेगा:

लाभार्थीलाभ
स्थानीय हलवाई/खाद्य विक्रेताBranding, Training, Grant
छोटे Food Entrepreneurs25% अनुदान (max ₹20 लाख)
SHGs (स्वयं सहायता समूह)Free Training, Packaging support
Food ProcessorsExport-ready products
पर्यटन से जुड़े व्यवसायFood Tourism Revenue

ODOC बनाम ODOP — क्या अंतर है?

ODOP (एक जनपद एक उत्पाद)ODOC (एक जनपद एक व्यंजन)
FocusHandicrafts, Manufacturing ProductsCulinary Heritage, Traditional Food
Launch20182026
Coverage75 जिले75 जिले
GI Tagहाँहाँ (प्रयास जारी)
Tourism LinkसीमितFood Tourism — Core strategy
Exportहाँहाँ — Export Ready Products

आगामी कदम — क्या होगा आगे?

प्रदेश के खाद्य विक्रेताओं एवं हलवाइयों का एक राज्यस्तरीय सम्मेलन शीघ्र ही लखनऊ में आयोजित किया जाएगा, जिसमें तकनीकी सत्रों के माध्यम से पैकेजिंग, गुणवत्ता एवं आधुनिक विपणन की जानकारी दी जाएगी तथा पारंपरिक व्यंजनों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

एक जनपद एक व्यंजन (ODOC) योजना क्या है?

इस योजना का उद्देश्य राज्य भर में क्षेत्र विशेष के व्यंजनों का दस्तावेजीकरण, ब्रांडिंग और प्रचार करना है।

एक जनपद एक व्यंजन योजना को कब मंजूरी मिली?

4 मई 2026 को योगी मंत्रिपरिषद ने इसे मंजूरी दी।

एक जनपद एक व्यंजन योजना का budget कितना है?

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में ₹150 करोड़ का प्रावधान।

उद्यमियों को कितना अनुदान मिलेगा?

25% तक अनुदान, अधिकतम ₹20 लाख रुपये।

एक जनपद एक व्यंजन योजना कितने जिलों में लागू होगा?

उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में।

District Level Committee में कौन होगा?

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में — विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों, खाद्य विभाग एवं पर्यटन विभाग के प्रतिनिधि।

ODOC में कौन-कौन से प्रसिद्ध व्यंजन शामिल हैं?

आगरा का पेठा, मथुरा का पेड़ा, वाराणसी की लस्सी, जौनपुर की इमरती, गोरखपुर के समोसे, मेरठ की रेवड़ी-गजक, लखनऊ का मलाई मक्खन, सहारनपुर का शहद और मुजफ्फरनगर का गुड़।

क्या GI Tag भी मिलेगा?

हाँ — ODOC के तहत जिलों के खास व्यंजनों को GI Tag दिलाने के प्रयास किए जाएंगे।

SHG महिलाओं को क्या फायदा होगा?

स्वयं सहायता समूहों को packaging, designing, quality improvement और food processing के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण मिलेगा।

ODOC का ODOP से क्या संबंध है?

ODOP (एक जनपद एक उत्पाद) की सफलता के बाद अब ODOC (एक जनपद एक व्यंजन) उसी concept का food sector में विस्तार है।

आधिकारिक स्रोत

  • UP Cabinet Decision — 4 मई 2026
  • मंत्री राकेश सचान (MSME, UP) — Press Statement
  • Business Standard Hindi, Asianet News Hindi — May 2026

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