| 📌 अपडेट बॉक्स योजना: संशोधित राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD) — पशुपालन एवं डेयरी विभाग कैबिनेट मंज़ूरी: मार्च 2025, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बजट: ₹2,790 करोड़ (15वें वित्त आयोग चक्र, 2021-22 से 2025-26) लक्ष्य: देशभर में 10,000 नई डेयरी सहकारी समितियां (खासकर पूर्वोत्तर, पहाड़ी क्षेत्र और केंद्रशासित प्रदेशों में) 2 घटक: Component A (इंफ्रास्ट्रक्चर) और Component B — Dairying through Cooperatives (DTC) |
शुरुआत — एक गांव की डेयरी सहकारी समिति
बुंदेलखंड के एक गांव में किसान पहले अपना दूध बिचौलियों को कम दाम पर बेचने को मजबूर थे, क्योंकि पास में कोई ठंडा करने की सुविधा (chilling plant) नहीं थी और दूध जल्दी खराब हो जाता था। NPDD के तहत गांव में नई डेयरी सहकारी समिति बनी, साथ में एक छोटा Bulk Milk Cooling Unit लगा — अब किसान अपना दूध सीधे सहकारी समिति को बेचते हैं, टेस्टिंग सही होती है, भुगतान समय पर मिलता है, और दाम भी बिचौलियों से बेहतर मिलता है। यही NPDD का मकसद है — व्यक्ति को सीधे पैसा देने की योजना नहीं, बल्कि दूध बेचने का पूरा तंत्र मज़बूत करने की योजना।
| सीधा जवाब: NPDD किसी व्यक्तिगत किसान को सीधे नकद सब्सिडी देने वाली योजना नहीं है — यह गांव-गांव में दूध ठंडा करने के प्लांट, टेस्टिंग लैब और डेयरी सहकारी समितियां बनाने के लिए ₹2,790 करोड़ की केंद्रीय योजना है। फायदा किसान को परोक्ष रूप से मिलता है — बेहतर दूध की कीमत, समय पर भुगतान और संगठित बाज़ार तक पहुंच के ज़रिए। सीधी सब्सिडी चाहने वालों के लिए Nandini/Nand Baba जैसी अलग dairy unit योजनाएं देखें। |
एक नज़र में NPDD
| बिंदु | जानकारी |
| विभाग | पशुपालन एवं डेयरी विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय |
| योजना प्रकार | केंद्रीय क्षेत्र योजना (Central Sector Scheme) |
| कुल बजट | ₹2,790 करोड़ (2021-22 से 2025-26) |
| लागू करने वाली एजेंसियां | NDDB, राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन, मिल्क यूनियन |
| नई सहकारी समितियां (लक्ष्य) | 10,000 (मुख्यतः पूर्वोत्तर, पहाड़ी क्षेत्र, केंद्रशासित प्रदेश) |
| Milk Producer Companies | 2 नई कंपनियों के गठन के लिए विशेष अनुदान |
| किसे मिलता है लाभ | डेयरी सहकारी समितियां, मिल्क यूनियन (किसान को अप्रत्यक्ष लाभ) |
| आधिकारिक पोर्टल | https://dahd.gov.in/hi/schemes/programmes/npdd |
NPDD क्या है और क्यों बनाया गया
भारत में लाखों छोटे दूध उत्पादक बिना संगठित बाज़ार के बिचौलियों पर निर्भर रहते हैं, जिससे उन्हें दूध की सही कीमत नहीं मिलती। NPDD का मकसद है डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर — दूध ठंडा करने के प्लांट, टेस्टिंग लैब, प्रमाणन व्यवस्था — मज़बूत करके किसानों को सहकारी समितियों से जोड़ना, ताकि दूध बिचौलियों की बजाय सीधे संगठित बाज़ार तक पहुंचे।
Component A — इंफ्रास्ट्रक्चर
- गांव-स्तर पर दूध ठंडा करने के प्लांट (Bulk Milk Cooling Units)
- उन्नत दूध परीक्षण (testing) प्रयोगशालाएं
- गुणवत्ता प्रमाणन व्यवस्था
- पूर्वोत्तर क्षेत्र, पहाड़ी इलाकों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष फोकस — नई ग्राम डेयरी सहकारी समितियों का गठन
- 2 नई Milk Producer Companies (MPCs) के गठन के लिए विशेष अनुदान सहायता
Component B — Dairying through Cooperatives (DTC)
इस घटक के तहत मौजूदा सहकारी समितियों को मज़बूत किया जाता है ताकि वो ज़्यादा किसानों को जोड़ सकें, बेहतर विपणन (marketing) क्षमता बना सकें, और डेयरी कारोबार को संगठित बाज़ार से जोड़ सकें — जिससे किसान की सौदेबाज़ी की ताकत बढ़ती है।
किसान को असल में क्या फायदा मिलता है
- दूध का सही और पारदर्शी टेस्टिंग — गुणवत्ता के हिसाब से सही दाम
- समय पर भुगतान — सहकारी समिति के ज़रिए, बिचौलियों की देरी से मुक्ति
- संगठित बाज़ार तक पहुंच — बिचौलियों पर निर्भरता कम
- गांव में ही दूध ठंडा करने की सुविधा — दूध खराब होने का नुकसान कम
- नई सहकारी समिति बनने से पहली बार संगठित डेयरी व्यवस्था से जुड़ने का मौका (खासकर पूर्वोत्तर और पहाड़ी इलाकों में)
किसान इसका फायदा कैसे उठाएं
- अपने क्षेत्र की डेयरी सहकारी समिति (जैसे राज्य मिल्क फेडरेशन की स्थानीय शाखा) से संपर्क करें
- अगर गांव में अभी कोई सहकारी समिति नहीं है, तो राज्य डेयरी विभाग या NDDB के ज़रिए नई समिति बनाने का प्रस्ताव भेजा जा सकता है
- सहकारी समिति का सदस्य बनकर नियमित दूध बेचना शुरू करें — testing और payment प्रक्रिया समिति संभालती है
ध्यान दें: NPDD में व्यक्तिगत किसान के लिए कोई सीधा ऑनलाइन आवेदन फॉर्म नहीं है — यह इंफ्रास्ट्रक्चर योजना है, इसका फायदा सहकारी समिति के सदस्य बनने से मिलता है।
Rashtriya Gokul Mission और अन्य दुग्ध योजनाओं से फर्क
NPDD को अक्सर राष्ट्रीय गोकुल मिशन (देशी नस्ल संरक्षण और IVF तकनीक पर केंद्रित) या राज्यों की सीधी सब्सिडी योजनाओं (जैसे उत्तर प्रदेश की नंदिनी/नंद बाबा दुग्ध मिशन, जो व्यक्तिगत डेयरी यूनिट पर ₹80,000 से ₹31 लाख तक अनुदान देती हैं) से जोड़कर भ्रम हो जाता है। NPDD अलग है — यह इंफ्रास्ट्रक्चर और सहकारी ढांचे पर केंद्रित है, व्यक्तिगत यूनिट सब्सिडी नहीं देता।
संबंधित योजनाएं
- नंद बाबा दुग्ध मिशन (उत्तर प्रदेश) — व्यक्तिगत डेयरी यूनिट पर सीधी सब्सिडी
- नंदिनी कृषक समृद्धि योजना — 25 देशी गाय यूनिट पर ₹31.25 लाख अनुदान
- राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM) — देशी गोवंश संरक्षण
- राष्ट्रीय पशुधन मिशन — बकरी/भेड़/मुर्गी/सुअर पालन पर सब्सिडी
- मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना — छोटी डेयरी यूनिट पर अनुदान
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या NPDD से व्यक्तिगत किसान को सीधे पैसा मिलता है?
नहीं, यह इंफ्रास्ट्रक्चर और सहकारी ढांचे को मज़बूत करने की योजना है — फायदा अप्रत्यक्ष रूप से बेहतर दूध की कीमत और संगठित बाज़ार के रूप में मिलता है।
NPDD का कुल बजट कितना है?
₹2,790 करोड़, 15वें वित्त आयोग चक्र (2021-22 से 2025-26) के लिए।
NPDD में कितने Component हैं?
दो — Component A (इंफ्रास्ट्रक्चर: chilling plants, testing labs, नई सहकारी समितियां) और Component B (Dairying through Cooperatives — मार्केटिंग क्षमता बढ़ाना)।
NPDD और नंद बाबा दुग्ध मिशन में क्या फर्क है?
नंद बाबा दुग्ध मिशन (UP) व्यक्तिगत डेयरी यूनिट पर सीधी सब्सिडी देती है; NPDD राष्ट्रीय स्तर की इंफ्रास्ट्रक्चर/सहकारी योजना है, व्यक्तिगत सब्सिडी नहीं।
कितनी नई डेयरी सहकारी समितियां बनाने का लक्ष्य है?
10,000 नई समितियां, खासकर पूर्वोत्तर, पहाड़ी क्षेत्र और केंद्रशासित प्रदेशों में।
Milk Producer Company (MPC) क्या है?
किसानों का एक संगठित उत्पादक समूह जो दूध खरीद, प्रोसेसिंग और बिक्री खुद संभालता है — NPDD के तहत 2 नई MPC बनाने में विशेष सहायता मिल रही है।
किसान इसका फायदा कैसे उठाए, ऑनलाइन आवेदन कहां करें?
कोई सीधा ऑनलाइन आवेदन फॉर्म नहीं है — अपने क्षेत्र की डेयरी सहकारी समिति से जुड़ें या नई समिति बनाने के लिए राज्य डेयरी विभाग/NDDB से संपर्क करें।
NPDD किस मंत्रालय के अंतर्गत आता है?
मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अंतर्गत।
क्या ये योजना पूरे देश में लागू है?
हां, पूरे देश में लागू है, विशेष फोकस पूर्वोत्तर, पहाड़ी क्षेत्र और केंद्रशासित प्रदेशों पर है।
NPDD किसने लागू किया?
National Dairy Development Board (NDDB) और राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन/मिल्क यूनियन के ज़रिए।
लेखक: सरिता मिश्रा — सरिता “सरकारी योजना” की मुख्य लेखिका हैं। वे केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं पर शोध करके उन्हें आसान हिंदी में समझाती हैं, ताकि हर आम परिवार ज़रूरी जानकारी आसानी से समझ सके। हर लेख आधिकारिक स्रोतों (PIB, मंत्रालय की वेबसाइट और सरकारी पोर्टल) से जाँचने के बाद ही प्रकाशित किया जाता है।



