सरकार ने देश के सभी भूधारक लघु और सीमाांत किसानों के लिए “प्रधानमंत्री किसान मान-धन योजना (पीएम-केएमवाई)”, नामक वृद्धावस्था पेंशन योजना शुरू की है जो एक स्वैच्छिक और अंशदायी पेंशन स्कीम है और इसमें शामिल होने की आयु 18 से 40 वर्ष है। यह स्कीम 9 अगस्त, 2019 से प्रभावी है।
प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के उद्देश्य
सरकार की ओर से किसानों के लिए आय और मूल्य समर्थन के लिए कई योजनाए चलाई गई हैं। तथापि किसानों के लिए एक सामाजिक सुरक्षा कवच सर्जित करने की जरूरत महसूस की गई है क्योंकि वृद्धावस्था में अधिकांश किसानों के आजीविका के साधन नहीं रह जाते धधकाांश ककसानों की आजीपवका के साधन नही रह जाते। खेती- बाडी के लिए खेतों में कडी मेहनत करनी होती है जो उनकी उम्र की इस अवस्था में कठीन होता है। यह समस्या लघु और सीमाांत किसानों के लिए और भी बडी होती है क्योंकि उनके पास बुढापे
में बेहद कम या शून्य बचत होती है। प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के अंतर्गत सभी भूधारक लघु और सीमांत किसानों पुरूष और स्त्री दोनों के लिए 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर 3000 रूपए की एक सुनिश्चित मासिक पेंशन की व्यवस्था की गई है।
प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना की पात्रता
पीएम किसान मानधन योजना में 18 से 40 वर्ष के बीच के किसान पेंशन योजना में भाग ले सकते हैं। जिनके पास खेती के लिए अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि है। उन्हें योजना के तहत न्यूनतम 20 वर्षों के लिए मासिक 55 रुपये और अधिकतम 40 वर्ष तक योगदान करना होगा। इस योजना के तहत किसान का योगदान सरकार द्वारा किए गए योगदान के बराबर होगा।
पीएम किसान मानधन योजना में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया
पीएम किसान मानधन योजना के लिए, किसान को निकटतम कॉमन सर्विस सेंटर में जाना होगा। और अपना पंजीकरण करवाना होगा। इसके लिए किसान के आधार कार्ड और खसरा खतियान की एक प्रति लेनी होगी। इसके साथ ही किसान और बैंक की पासबुक की दो पासपोर्ट साइज फोटो भी लगानी होगी। पंजीकरण के दौरान, किसान के पेंशन यूनिक नंबर और पेंशन कार्ड बनाया जाएगा, इसके लिए अलग से कोई शुल्क नहीं है।
योजना को बंद करना चाहते हैं
यदि कोई किसान इस पीएम किसान मानधन योजना को बीच में छोड़ना चाहता है तो उसका पैसा नष्ट नहीं होगा। जब तक वह स्कीम छोड़ता है, तब तक जो पैसा जमा होगा। उसे बैंकों के बचत खाते के बराबर ब्याज मिलेगा। यदि पॉलिसी धारक की मृत्यु हो जाती है, तो उसकी पत्नी को 50 प्रतिशत प्राप्त होता रहेगा।
Sarita Mishra is the founder and chief author of Sarakari Yojna, India’s
Hindi-language hub for government welfare schemes. With 17+ years of
experience researching central and state government programs, she
specializes in rural development schemes, pension programs, farmer
welfare initiatives, and women’s empowerment policies. All articles on
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ministry notifications, and gazette publications.
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