🚨 Breaking (19 मई 2026):केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 19 मई 2026 को भुवनेश्वर में आयोजित Eastern Regional Agriculture Conference में “खेत बचाओ अभियान” की घोषणा की।अभियान की आधिकारिक ground-level शुरुआत 1 जून से है, लेकिन ICAR द्वारा preliminary digital outreach और regional awareness camps के माध्यम से घोषणा से पहले ही 2.7 करोड़ से अधिक नागरिकों तक इसका संदेश पहुंच चुका था।
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एक नज़र में — Quick Info Table
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| अभियान का नाम | खेत बचाओ अभियान 2026 |
| घोषणा तिथि | 19 मई 2026 |
| अभियान अवधि | 1 जून – 30 जून 2026 |
| नेतृत्व | केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान |
| क्रियान्वयन | कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय + ICAR |
| मुख्य नारा | “सही मात्रा, सही समय, सही तरीका — यही है संतुलित उर्वरक का असली मंत्र” |
| प्रमुख उद्देश्य | मृदा संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती |
| आधिकारिक स्रोत | PIB PRID: 2266599 |
खेत बचाओ अभियान क्या है?
खेत बचाओ अभियान भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा शुरू किया गया एक राष्ट्रव्यापी जन-जागरण अभियान है। केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 19 मई 2026 को भुवनेश्वर में आयोजित Eastern Regional Agriculture Conference में इसे जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।
यह अभियान 1 जून से 30 जून 2026 तक पूरे देश में चलाया जाएगा। इसका मूल उद्देश्य है — रासायनिक खादों के अंधाधुंध उपयोग से खराब हो रही कृषि भूमि को बचाना और किसानों को Soil Health Card के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए प्रेरित करना।
UPSC Perspective: यह अभियान “Soil Health Management” और “Sustainable Agriculture” के लक्ष्यों से जुड़ा है। भारत में रासायनिक उर्वरकों पर सब्सिडी बोझ FY2025-26 में ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक था। अत्यधिक Urea उपयोग से N:P:K अनुपात बिगड़ रहा है जो दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
अभियान की पृष्ठभूमि — समस्या क्या है?
भारत में पिछले कई दशकों से किसान ज़रूरत से अधिक रासायनिक खाद — विशेषकर Urea — डालते आए हैं। इसके दुष्परिणाम:
- मिट्टी की उपजाऊ क्षमता धीरे-धीरे घट रही है
- भूमिगत जल प्रदूषित हो रहा है
- फसल की गुणवत्ता और पोषण मूल्य कम हो रहा है
- किसान की लागत बढ़ रही है, मुनाफा घट रहा है
- सरकार पर उर्वरक सब्सिडी का बोझ बढ़ता जा रहा है
इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए “खेत बचाओ अभियान” शुरू किया गया है।
अभियान के मुख्य उद्देश्य
1. मिट्टी का संरक्षण रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग को रोककर भूमि की उपजाऊ क्षमता को बचाना।
2. संतुलित उर्वरक उपयोग Soil Health Card की रिपोर्ट के आधार पर जितनी ज़रूरत हो उतनी ही खाद डालने की वैज्ञानिक सलाह देना।
3. प्राकृतिक खेती को बढ़ावा रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करके जैविक और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करना।
4. किसान की लागत में कमी अनावश्यक खाद और कीटनाशकों पर होने वाले खर्च को बचाकर किसान की Net Income बढ़ाना।
5. दलहन-तिलहन में आत्मनिर्भरता दलहन मिशन और तिलहन मिशन के साथ तालमेल करते हुए घरेलू उत्पादन बढ़ाना और आयात कम करना।
अभियान में क्या-क्या होगा?
गांव-गांव वैज्ञानिकों का दौरा
ICAR और कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक सीधे गांवों में जाकर Soil Health Card की जांच रिपोर्ट के आधार पर किसानों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन देंगे।
विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम
किसानों को हरी खाद, जैव-उर्वरक (Bio-fertilizers), Integrated Nutrient Management (INM) का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ
अभियान के दौरान किसानों को ये योजनाएं Camp Mode में दी जाएंगी:
- किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)
- Soil Health Card
- Farmer ID (किसान पहचान पत्र)
- कृषि यंत्रीकरण सब्सिडी
- PM फसल बीमा योजना Enrollment
व्यापक जनभागीदारी
ग्राम पंचायतें, सरपंच, Farmer Producer Organisations (FPOs), और Self Help Groups (SHGs) सक्रिय रूप से जुड़ेंगे।
Soil Health Card — अभियान की धुरी
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने स्पष्ट कहा — “Soil Health Card केवल कागज पर नहीं रहना चाहिए, इसका उपयोग खेत तक होना चाहिए।”
Soil Health Card से पता चलता है:
- मिट्टी में कौन-सा पोषक तत्व (N, P, K, Zinc, Boron) कम है
- कितनी मात्रा में और कौन-सी खाद डालनी है
- मिट्टी का pH और Organic Carbon कितना है
अभियान के दौरान जिन किसानों के पास Soil Health Card नहीं है, उनके खेतों की मिट्टी जांच निःशुल्क की जाएगी।
अभियान के अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
नकली बीज और घटिया कीटनाशकों पर कार्रवाई केंद्रीय मंत्री ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि नकली बीज और घटिया कीटनाशक बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। नया कीटनाशक कानून लाने की दिशा में काम हो रहा है।
KCC की पहुंच बढ़ाना पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में कृषि ऋण का प्रवाह बढ़ाने के लिए बैंकों के साथ जल्द बैठक होगी।
हर राज्य बनाए कृषि रोडमैप प्रत्येक राज्य अपने Agri-Climatic conditions के अनुसार जिला-स्तरीय कृषि रोडमैप तैयार करेगा।
PM-AASHA के तहत दलहन-तिलहन खरीद किसानों को उचित मूल्य मिले — इसके लिए PM-AASHA (PM Annadata Aay Sanrakshan Abhiyan) का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।
किसानों को क्या फायदा होगा?
| लाभ | विवरण |
|---|---|
| खाद पर बचत | ज़रूरत के अनुसार खाद → कम खर्च |
| अधिक उत्पादन | संतुलित पोषण → बेहतर फसल |
| मिट्टी की उम्र बढ़ेगी | कम रसायन → लंबे समय तक उपजाऊ जमीन |
| योजनाओं का लाभ | KCC, Farmer ID, बीमा — Camp में मिलेगा |
| वैज्ञानिक सलाह मुफ्त | ICAR विशेषज्ञ गांव में आएंगे |
संबंधित योजनाएं और लेख
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2026 → — खरीफ Enrollment Last Date 31 जुलाई
- Farmer Registry 2026 (किसान पहचान पत्र) → — Farmer ID कैसे बनाएं
- PM किसान सम्मान निधि 2026 → — 23वीं किस्त Status Check
- PM Vishwakarma Yojana → — कृषि उपकरण सब्सिडी
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
खेत बचाओ अभियान कब से कब तक चलेगा?
1 जून 2026 से 30 जून 2026 तक — पूरे देश में।
इस अभियान में किसान कैसे जुड़ सकते हैं?
अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), ग्राम पंचायत या कृषि विभाग कार्यालय से संपर्क करें। गांव में Camp लगाए जाएंगे।
Soil Health Card नहीं है तो क्या करें?
अभियान के दौरान मुफ्त मिट्टी जांच की सुविधा दी जाएगी। नज़दीकी कृषि कार्यालय में संपर्क करें।
क्या अभियान में KCC मिलेगा?
हाँ। KCC के लंबित आवेदनों का निपटारा और नए आवेदन Camp Mode में किए जाएंगे।
खेत बचाओ अभियान किसने शुरू किया?
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 29 मई 2026 को राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में इसकी घोषणा की। क्रियान्वयन कृषि मंत्रालय और ICAR मिलकर करेंगे।
अभियान का नारा क्या है?
“सही मात्रा, सही समय, सही तरीका — यही है संतुलित उर्वरक का असली मंत्र।”
क्या प्राइवेट किसान भी इसका लाभ ले सकते हैं?
हाँ। यह अभियान सभी किसानों के लिए है — चाहे वे भूमि स्वामी हों, बटाईदार हों या किराएदार किसान।
ICAR की क्या भूमिका है?
ICAR के वैज्ञानिक गांव-गांव जाकर मिट्टी जांच, संतुलित उर्वरक सलाह और जैव-उर्वरक प्रशिक्षण देंगे।
आधिकारिक स्रोत
- PIB प्रेस विज्ञप्ति — PRID: 2266599, दिनांक 29 मई 2026
- कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)
Sarita Mishra is the founder and chief author of Sarakari Yojna, India’s
Hindi-language hub for government welfare schemes. With 17+ years of
experience researching central and state government programs, she
specializes in rural development schemes, pension programs, farmer
welfare initiatives, and women’s empowerment policies. All articles on
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ministry notifications, and gazette publications.
