हरेला पर्व 2026 — उत्तराखंड का हरियाली लोकपर्व | 16 जुलाई को कर्क संक्रांति पर | रजत जयंती पर 15.50 लाख पौधे | परंपरा, महत्व और पर्यावरण संदेश | पूरी जानकारी

📌 अपडेट (2026): उत्तराखंड की रजत जयंती (25वें वर्ष) के उपलक्ष्य में हरेला पर्व 2026 ऐतिहासिक रूप से मनाया जाएगा। 16 जुलाई से शुरू होने वाला यह लोक पर्व पूरे एक माह तक बेहद खास अंदाज में मनाया जाएगा। देहरादून जनपद में थीमैटिक (विषय-आधारित) तरीके से विशेष प्रजातियों के 15.50 लाख पौधे लगाकर ईको-टूरिज्म को नई ऊंचाई देने का संकल्प लिया गया है।

हरेला उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में मनाया जाने वाला एक लोकपर्व है। हरेला का शाब्दिक अर्थ ही है “हरियाली”। यह त्योहार हमें प्रकृति से जोड़ता है। 2026 में हरेला 16 जुलाई, गुरुवार को मनाया जाएगा — कर्क संक्रांति पर। परंपरानुसार हरेला पर्व से ठीक 9 से 11 दिन पहले घरों में हरेला बोया जाता है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के साथ-साथ वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देता है।

Table of Contents

हरेला पर्व एक नज़र में

विवरणजानकारी
पर्व का नामहरेला
राज्यउत्तराखंड (मुख्यतः कुमाऊं क्षेत्र)
2026 में तिथि16 जुलाई 2026 (गुरुवार)
आधारकर्क संक्रांति (श्रावण माह की संक्रांति)
Harela बोने की परंपरा9-11 दिन पहले — टोकरी में अनाज के बीज
हरेला के बीजगेहूं, जौ, मक्का, सरसों, दाल
2026 Specialउत्तराखंड रजत जयंती (25वें वर्ष)
अभियान अवधि16 जुलाई से एक माह
देहरादून में पौधे15.50 लाख पौधे
धार्मिक महत्वभगवान शिव-पार्वती का पावन मिलन
पर्यावरण संदेशवृक्षारोपण, हरियाली, प्रकृति संरक्षण
पकवानबेडू पूड़ी, हलवा, खीर, दही-केला
Harela Mantra“रोग शोक निवारणार्थ, प्राण भक्षक वनस्पते…”
Connectionहरित हरिद्वार अभियान + Kumbh 2027

हरेला क्या है — और इसका अर्थ क्या है?

“हरेला” शब्द उत्तराखंड के कुमाऊंनी शब्द “हरियाला” से आया है, जिसका अर्थ है “हरियाली का दिन।” ऐसा माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति कुमाऊं क्षेत्र में हुई थी।

उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा हरेला केवल एक पारंपरिक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति, खेती, हरियाली और जीवन के प्रति आभार व्यक्त करने का पर्व माना जाता है।

हरेला पर्व हरियाली, कृषि, पशुपालन और प्रकृति संरक्षण से जुड़ा हुआ है।

लोक परंपराओं के अनुसार यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पावन मिलन का प्रतीक माना जाता है।

UPSC/UKPSC Perspective: हरेला पर्व — Cultural Ecology का एक classic example है। यह पर्व किसानों के लिए Sowing Season की scientific indicator था — घर में जितना अच्छा हरेला उगेगा उस वर्ष उतनी ही अच्छी फसल की पैदावार होगी — यह आने वाली नई फसल की समृद्धि का सूचक है। यह Agro-climatological knowledge को cultural ritual में embed करने का उदाहरण है। आज यह SDG-13 (Climate Action) और SDG-15 (Life on Land) के साथ align करता है।

हरेला कब मनाया जाता है?

हर वर्ष कर्क संक्रांति के दिन मनाए जाने वाले इस त्योहार के बारे में इस बार लोगों में दुविधा है कि हरेला 16 जुलाई को है या 17 जुलाई को? उत्तराखंड में पारंपरिक रूप से कर्क संक्रांति 16 जुलाई को ही सर्वमान्य है। अतः हरेला 16 जुलाई को ही मनाया जाएगा।

हरेला इस साल 16 जुलाई को मनाया जा रहा है, जो मॉनसून के मौसम की शुरुआत का प्रतीक है।

हरेला बोने की परंपरा — 9-11 दिन पहले से

हरेला का सबसे अनूठा ritual है — पर्व से कई दिन पहले घर में बीज बोना।

परंपरानुसार हरेला पर्व से ठीक 9 से 11 दिन पहले घरों में हरेला बोया जाता है। कुछ लोग हरेला को 11 दिन, कुछ 10 दिन और कुछ परिवार 9 दिन पूर्व बोते हैं।

यह कैसे बोते हैं:

Common seeds include wheat, barley, maize, mustard, and pulses.

Step 1: टोकरी या थाली में मिट्टी भरें

Step 2: गेहूं, जौ, मक्का, सरसों, दाल — मिश्रित बीज बोएं

Step 3: रोज़ पानी देते रहें — धूप से बचाएं (घर के अंदर रखें)

Step 4: 9वें दिन Harela की weeding की जाती है pure plant leaf PATI से।

Step 5: 10वें दिन — हरेला दिवस — काटें और पूजा करें

हरेला दिवस की पूजा विधि

हरेला काटने के बाद परिवार का मुखिया या गांव कुछ rituals perform करते हैं और चंदन से तिलक लगाते हैं। वे यह mantra भी जपते हैं: “रोग शोक निवारणार्थ, प्राण भक्षक वनस्पते, इदा गच्छा नमस्तेस्तु हर देव नमोस्तुते।”

Rituals complete होने के बाद Harela को God/Goddess को अर्पित किया जाता है। फिर घर की एक वृद्ध महिला Harela apply करती हैं — पहले पैर पर, फिर घुटने पर, कंधे पर और अंत में सिर पर।

मान्यताएं — Harela का फसल से संबंध

टोकरी में अनाज के पौधे जितने लंबे और हरे-भरे होते हैं, माना जाता है कि उस वर्ष खेतों में अच्छी पैदावार होगी।

यहां मान्यता है कि जिस पेड़ की पौध तैयार करना मुश्किल होता है, उसकी एक टहनी हरेला के दिन रोप दी जाए तो उसमें भी नई कोपलें निकल आती हैं।

एक मान्यता यह भी है कि अगर परिवार में कोई हरेला पर मर जाए, तो वह परिवार हरेला नहीं मनाता जब तक उनके परिवार में कोई पैदा नहीं हो जाता। यहाँ तक कि अगर हरेला के दिन गाय के बछड़ा हो, तो भी यह शुभ माना जाता है।

पारंपरिक पकवान

हरेला पूजन के पश्चात सभी लोग अपने घरों में पूड़ी, बड़े, खीर और हलवा जैसे पारंपरिक पकवानों का आनंद अपने परिवार साथ बैठकर लेते हैं।

वृक्षारोपण — हरेला का पर्यावरण संदेश

उत्तराखंड में इस दिन बड़े पैमाने पर पौधरोपण करने की प्राचीन परंपरा है। लोगों की मान्यता है कि आज के दिन लगाया गया पौधा सदैव हराभरा रहता है।

हरेले के दिन खासकर फलदार, छायादार और चारा-पत्ती देने वाले पौधे रोपे जाते हैं।

समय के साथ हरेला पर्व का स्वरूप और अधिक व्यापक हुआ है। अब इस अवसर पर उत्तराखंड के कई क्षेत्रों में बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान आयोजित किए जाते हैं।

हरेला 2026 — रजत जयंती पर ऐतिहासिक आयोजन

उत्तराखंड की रजत जयंती (25वें वर्ष) के उपलक्ष्य में आगामी 16 जुलाई से शुरू होने वाला यह लोक पर्व पूरे एक माह तक बेहद खास और यादगार अंदाज में मनाया जाएगा।

देहरादून में 2026 की तैयारी:

देहरादून में 15.50 लाख पौधे लगाने की योजना है। इन पौधों की निगरानी के लिए हरित कंट्रोल रूम भी बनाया जाएगा। इसके अलावा eco-tourism को बढ़ावा देने के लिए Quality Forest भी विकसित किया जाएगा।

पौधा रोपण केवल रस्म अदायगी नहीं बल्कि इन्हें बचाने के लिए भी व्यापक अभियान चलाया जाएगा।

हरेला और हरित हरिद्वार अभियान — Connection

हरेला पर्व और हरित हरिद्वार अभियान (Kumbh 2027 के लिए) दोनों एक साथ मिलकर Monsoon 2026 में उत्तराखंड को हरा-भरा बनाने की दिशा में काम करेंगे।

📄 हरित हरिद्वार अभियान 2026 — पूरी जानकारी →

हरेला का आधुनिक महत्व

बढ़ते तापमान, बदलते मौसम, घटते जंगल और पर्यावरणीय चुनौतियों के दौर में हरेला का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि हरियाली केवल प्रकृति की सुंदरता नहीं, बल्कि जीवन का आधार है।

यदि भारत के अन्य राज्य भी उत्तराखंड की इस परंपरा को अपनाएं और हर वर्ष एक दिन वृक्षारोपण को समर्पित करें, तो यह हमारे पर्यावरण को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक मजबूत कदम होगा।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हरेला पर्व 2026 कब है?

16 जुलाई 2026, गुरुवार को — कर्क संक्रांति पर।

हरेला का अर्थ क्या है?

“हरेला” शब्द कुमाऊंनी शब्द “हरियाला” से आया है जिसका अर्थ है “हरियाली का दिन।”

हरेला में क्या बोया जाता है?

गेहूं, जौ, मक्का, सरसों और दाल — mixed seeds।

हरेला कितने दिन पहले बोना होता है?

9 से 11 दिन पहले।

2026 में हरेला special क्यों है?

उत्तराखंड रजत जयंती (25वें वर्ष) — इस बार 16 जुलाई से एक माह तक मनाया जाएगा।

देहरादून में 2026 में कितने पौधे लगेंगे?

15.50 लाख पौधे — हरित कंट्रोल रूम के साथ।

हरेला का फसल से क्या संबंध है?

टोकरी में अनाज के पौधे जितने लंबे और हरे-भरे होते हैं, उस वर्ष खेतों में अच्छी पैदावार मानी जाती है।

हरेला में कौन सा mantra जपते हैं?

“रोग शोक निवारणार्थ, प्राण भक्षक वनस्पते, इदा गच्छा नमस्तेस्तु हर देव नमोस्तुते।”

हरेला किस क्षेत्र में मनाया जाता है?

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुछ इलाकों में — मुख्यतः कुमाऊं क्षेत्र में।

हरेला के पारंपरिक पकवान कौन से हैं?

पूड़ी, बड़े, खीर, हलवा और दही-केला।

आधिकारिक जानकारी

  • उत्तराखंड सरकार — uk.gov.in
  • देहरादून DM Office — Harela Mahaabhiyan 2026

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